लखीमपुर खीरी। हिंदी को रोजी-रोजगार से जोड़कर इसके विकास को नए आयाम दिए जा सकते हैं। साहित्यकारों का कहना है कि लंबे समय तक वही भाषा जीवित रह सकती है जो रोजगार से जुड़ी हो। यह सही कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ी है। सोशल मीडिया के प्रसार से हिंदी और अधिक मजबूत हुई है।
साहित्यकार यह बात मानते हैं कि आज के दौर में हिंदी वैश्विक भाषा बनने की ओर बढ़ रही है। भारत से जाकर विदेशों में पढ़ने, नौकरी और रोजगार करनेेेे वाले लोग अपने स्तर से विदेशों में भी अपनी मातृभाषा को आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन अपने देश में सरकारी कामकाज की भाषा में हिंदी का इस्तेमाल बढ़ाया जाना जरूरी है। यह हिंदी की स्वीकार्यता और लोकप्रियता ही है कि आज हिंदी फिल्में पूरी दुनिया में पसंद की जाती हैं।
हिंदी को रोजगार से जोड़ना जरूरी
भाषा वही लंबे समय तक जीवित रह सकती है जो रोजगार से जुड़ी हो। निसंदेह अब धीरे-धीरे हिंदी की स्वीकार्यता देश में होने लगी है। इसमें सरकारी प्रयासों से कहीं अधिक योगदान हिंदी सिनेमा और टीवी चैनल्स का है। दुर्भाग्य से राजभाषा का दर्जा प्राप्त होने के पश्चात भी हिंदी में रोजगार के अवसर बहुत कम है। इसलिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में एक प्रश्न पत्र राजभाषा का भी हो। इससे हिंदी की सार्थकता एवं लोकप्रियता बढ़ेगी। पर्यटन व्यवसाय में हिंदी के विकास की अनंत संभावनाएं हैं। इससे रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही साथ ही विभिन्न संस्कृतियों को समझने और सामंजस्य स्थापित करने की समझ विकसित होगी।
- संजीव जायसवाल, साहित्यकार
रोजगार और व्यापार में ताकतवर हो रही हिंदी
आज के दौर में हिंदी बहुराष्ट्रीय भाषा बन चुकी है। रोजगार शिक्षा और व्यापार के लिए हिंदी बहुत ताकतवर भाषा बन रही है। तमाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कार्य और व्यापार के लिए हिंदी का दामन थाम रखा है। लाकडाउन के दौरान हिंदी माध्यम की ऑनलाइन की कक्षाओं से न सिर्फ शिक्षकों और छात्रों को नया प्लेटफार्म मिला है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम ने कमाई का जरिया भी दिया है। साहित्य, सिनेमा, टीवी, पत्रकारिता आदि के द्वारा हिंदी ने अपना परचम पूरे विश्व में फैलाया है। अभी भी अदालतों, सरकारी दफ्तरों की भाषा हिंदी नहीं बन पाई है। उम्मीद है कि जल्द यह जन-मन की भाषा बनेगी।
- सुरेश सौरभ, युवा साहित्यकार लखीमपुर खीरी
हिंदी में भी रोजगार की हैं बड़ी संभावनाएं
आज के समय में जिस तरह से हिंदी की लोकप्रियता बढ़ी है उसे देखते हुए हिंदी भाषा के क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं जिन राज्यों में हिंदी भाषा का प्रचलन है वहां पर हिंदी अधिकारी, हिंदी सहायक जैसे पदों पर तथा हिंदी मीडिया के क्षेत्र में व हिंदी फिल्मों की स्क्रिप्ट ,डायलॉग लेखन आदि प्रकार के कार्यों में हिंदी जानने वालों की मांग बढ़ गई है। जिनकी पकड़ हिंदी भाषा पर बेहतरीन है उनके लिए इन तमाम क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं। हिंदी के साथ-साथ जिन्हें अन्य दूसरी भाषा का भी अच्छा ज्ञान है वे पर्यटक स्थलों पर दुभाषिये के रूप में अपना कॅरिअर स्थापित कर सकते हैं।
- रमाकान्त चौधरी, साहित्यकार/कवि, गोला गोकर्णनाथ
हिंदी हमारी संस्कृति की संवाहक
हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ-साथ हमारी संस्कृति की संवाहक भी है, फिर भी स्थिति यह है कि हम जितना उसे समृद्ध बनाने का प्रयास करते हैं वह हमसे उतनी ही दूर भी हो रही है। शायद ही ऐसा कोई घर परिवार हो जहां प्रतिदिन बोले जाने वाले 100 शब्दों में से लगभग 20 शब्द निश्चित ही अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा के होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि आज का नवयुवक इसे बेरोजगारों की भाषा मान बैठा है। हमारा दायित्व है कि हम इसके सार्थक संवर्धन के लिए प्रयास करें और इसे अन्य व्यावसायिक वैश्विक भाषाओं की तरह स्थापित करने में सतत प्रयास शील हों।
- नंदी लाल निराश, गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर खीरी