लखीमपुर खीरी। जिले में डेंगू और मलेरिया भले ही नियंत्रण में दिख रहा हो लेकिन जरा सी असावधानी आपको दिक्कत में डाल सकती है और कभी भी बुखार दबे पांव आपको गिरफ्त में ले सकता है। सावधानी बरतें क्योंकि मरीज निरंतर बढ़ रहे हैं।
अगर पिछले साल को देखें तो इस बार फिलहाल कुछ राहत है और मच्छरजनित बीमारियां नियंत्रण में दिख रहीं हैं। लेकिन जरा सी असावधानी से हालात भयावह हो सकते हैं। कोरोना के साथ बुखार घातक हो सकता है।
पिछले दो सालों में डेंगू और मलेरिया के मरीजों की कम संख्या के लिए अधिकारी गंबूसिया मछली को वजह बता रहे हैं। वर्ष 2019 में मलेरिया, फाइलेरिया और डेंगू का प्रकोप देखकर तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने जिला प्रशासन के सहयोग से गंबूसिया मछली तालाबों में डलवानी शुरू कीं। अब तक पांच हजार से अधिक तालाबों में ये मछली डलवाई जा चुकी है। बावजूद इसके चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि वे असावधानी न बरतें, जरा सी लापरवाही दिक्कत पैदा कर सकती है।
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वर्ष मलेरिया डेंगूू,
2016 194 31
2017 148 26
2018 187 23
2019 209 62
2020 78 37
2021 70 06
(ये आंकड़े 17 सितंबर तक के हैं।)
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समान लक्षण बढ़ा सकते हैं मुसीबत
डॉक्टर बताते हैं कि बुखार आने पर अक्सर लोग मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेते हैं या फिर गांव और कस्बे में झोलाछाप को दिखाकर दवाएं ले लेते हैं। झोलाछाप बुखार का कारण जाने बिना दवा खिलाते रहते हैं। ऐसे में यदि बुखार कोरोना की वजह से हुआ तो पीड़ित की जान को खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बुखार को नजरअंदाज न कर सरकारी अस्पताल में दिखाकर गंभीरता से इलाज कराएं।
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डेंगू और मलेरिया के केस कम होने के संभावित कारण
- कोरोना संक्रमण काल में साफ सफाई पर जोर
- ब्लीचिंग छिड़काव से मच्छरों की संख्या में आई कमी
- लोगों का घरों में अधिक रहना
- कोरोना काल में बीमारियों को लेकर अधिक सतर्कता बरतना
- जिले के तालाबों में गंबूसिया मछली का डाला जाना
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इस तरह बचाव कर रहें सुरक्षित
- घर के आसपास पानी न इकट्ठा होने दें।
- गमलों एवं कबाड़ में पानी न जमा होने दें।
- कूलर का पानी सप्ताह में बदलते रहें।
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- घर की खिड़कियों में जाली लगवाएं।
- मच्छर भगाने वाले सुरक्षित उपाय करें।
- शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहने।
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कोरोना काल में बीमारियों को लेकर लोग बेहद सतर्क हुए हैं। निरंतर सफाई अभियान और सेनिटाइजेशन होने से मच्छरों की संख्या में भी कमी आई है। यही वजह है कि गतवर्षों की अपेक्षा इस बार डेंगू, मलेरिया काफी नियंत्रण में हैं। हालांकि बुखार आदि को लेकर लापरवाही बिल्कुल न करें। नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच कराकर इलाज कराएं। बुखार को नजर अंदाज करना मुसीबत बन सकता है।
-डॉ. संतोष मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल