जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सीमित बेड होने के कारण बेंच पर लिटाकर किया जाता है इलाज
लखीमपुर खीरी। जिम्मेदारों की अनदेखी से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज तक नहीं मिल रहा है। सीमित बेड होने के कारण सबसे बड़ी दिक्कत इनको भर्ती करने में आ रही है। रविवार को इमरजेंसी ओपीडी से लेकर वार्ड तक में बेड खाली न होने के कारण एक मरीज को खिड़की से लटकाकर बोतल चढ़ाई गई।
जब से जिला अस्पताल एमसीएच विंग में शिफ्ट हुआ है तब से मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं, क्योंकि जिला अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी चल रही है। इसकी ओपीडी में तीन और वार्ड में सिर्फ दस बेड हैं, जबकि भर्ती होने मरीजों की संख्या रोजाना 20 से 25 रहती है। ऐसे में कुछ मरीजों को बेंच पर तो कुछ को स्ट्रेचर पर लिटाकर ही इलाज किया जा रहा है।
रविवार को इमरजेंसी की ओपीडी से लेकर वार्ड से सभी बेड फुल होने के चलते एक मरीज को बेंच पर खिड़की के सहारे बोतल लटाकर इलाज शुरू किया गया। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि इमरजेंसी वार्ड में दस तो ओपीडी में तीन बेड हैं। इसके अलावा चार स्ट्रेचर और सीमेंट की बेंच बनी हैं। भर्ती करने वाले मरीजों की संख्या रोजाना करीब 15 से 20 रहती है। ऐसे में मजबूरन बेंच आदि पर लिटाकर इलाज करना पड़ता है।
इमरजेंसी में रोजाना भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या करीब 20 से 25 रहती है, जबकि बेड करीब 15 ही हैं। इसलिए दिक्क्त आ रही है। भर्ती होने के बाद मरीज एमसीएच विंग में जाने के लिए तैयार नहीं होता, जबकि वहां बेड की कोई समस्या नहीं है।
- डॉ. मदनलाल, सीएमएस जिला अस्पताल