फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोला-शाहजहांपुर रोड पार करके देवीपुर के जंगल में पहुंचे हाथी

विज्ञापन
सड़क पार करते नेपाली हाथी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन
हाथियों ने सुभाष नगर और मथना में किसानों की फसलें रौंदी
विज्ञापन

रेंजर ने हाथियों के सहजनिया के जंगल में लौटने की आशंका जताई
ममरी (लखीमपुर खीरी)। मोहम्मदी रेंज के जंगल में पांच दिन से डेरा जमाए नेपाल के हाथियों का झुंड बृहस्पतिवार रात दो गुटों में बंट गया। इसमें एक गुट माता भुइयां देवी के जंगल में तो दूसरा गुट गोला-शाहजहांपुर रोड पार कर देवीपुर बीट के जंगल में जा पहुंचा और दोनों स्थानों पर हाथियों ने खूब उत्पात मचाया।
हाथियों ने माता भुइयां देवी के जंगल से लौटते वक्त बिहारीपुर फार्म के कई किसानों के खेतों में खड़ी गन्ना-धान की फसल रौंद डाली। फार्म के गुरिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह अमरीश सिंह, बबली सिंह आदि किसानों ने बताया कि जब हाथियों को भगाने का प्रयास किया गया तो हाथियों ने उन्हें ही दौड़ा लिया। किसानों की कई एकड़ में फैली फसलें बर्बाद कर जंगल की ओर चले गए, जिससे वहां के किसानों में दहशत है। रेंजर मोबिन आरिफ ने बताया कि लौटते वक्त झुंड के दो फाड़ हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि रात में हाथी एक जगह इकट्ठे होकर सहजनिया जंगल की ओर लौट जाएंगे।
विज्ञापन

अमीरनगर। बृहस्पतिवार की रात हाथियों ने सुभाष नगर और मथना गांव के किसानों की गन्ना और धान की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दी। हाथियों के झुंड ने जंगल से निकलकर सुभाष नगर के किसान मनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह, कुलवंत सिंह, मोहन सिंह और देवरिया के प्रधान पति जुल्फिकार के खेत में खड़ी गन्ने की फसल रौंद डाली। इसके बाद हाथियों का झुंड मथना गांव की ओर पहुंचा। यहां भी नवाब खां, सुनव्वर खां, राशिद खां, रुखसार खां, मान सिंह, डालचंद के अलावा कई किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया। यहां के किसानों ने हाथियों के झुंड को जंगल की तरफ खदेड़ दिया।

हाथियों के आने से बाघ और तेंदुए भी बदल रहे ठिकाना

ममरी। मोहम्मदी रेंज की महेशपुर देवीपुर बीट के जंगल में पांच दिन से डेरा डाले नेपाली हाथियों का झुंड बाघ और तेंदुआ के लिए भी मुसीबत बन गया है, जो अपने बचाव में इधर उधर भटक रहे हैं। कुछ बाघों ने तो जंगल छोड़कर अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बना लिया है।
विज्ञापन

जंगल से सटे बिहारीपुर, नयागांव, मुल्लापुर, अयोध्यापुर, बोझबा, मोठीखेड़ा, सुंदरपुर के ग्रामीणों की मानें तो हाथी जब से जंगल में आए हैं तब से कई बार गन्ने के खेतों में बाघ और तेंदुए विचरण करते देखे जा रहे हैं। उधर, रेंजर मोबीन आरिफ, फॉरेस्टर जगदीश वर्मा ने गांव वालों के इस कथन को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि हाथियों के आने से बाघ अपना ठिकाना बदल कर हाथियों से बचाव कर रहे हैं। बताया कि हाथियों का झुंड जिधर मूवमेंट करता है बाघ वह स्थान छोड़कर अपने बचाव में दूसरी तरफ चले जाते हैं। इस तरह ठिकाना बदल कर बाघ और तेंदुए जंगल में ही रह रहे हैं। उन्होंने माना कि हाथियों के आने से बाघों के प्राकृत वास में खलल जरूर पड़ा है। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें