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सुहेली नदी के तेज बहाव से पर्वतिया घाट पर बना बंधा टूटा

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पलियाकलां। इलाके के बुद्धापुरवा गांव के पर्वतिया घाट के पास काफी साल पहले ग्रामीणों ने सुहेली नदी की बाढ़ से बचाव के लिए बंधा बनाया था। रविवार को बंधा एक जगह से टूट गया। इसके बाद तेज धार के साथ पानी मझगईं बेल्ट के कई गांवों की ओर तेजी से रुख करने लगा है। सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण बंधे की मरम्मत में जुट गए हैं। उधर, एसडीएम और तहसीलदार ने भी बंधे का निरीक्षण किया और सुहेली बैराज के फाटकों को भी खुलवाया है।
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बता दें कि वर्ष 2005 में बुद्धापुरवा गांव के पर्वतिया घाट के पास चीनी मिल के सहयोग से ग्रामीणों ने करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबे बंधे का निर्माण किया था। इससे पहले लगभग हर साल ही सुहेली नदी की विभीषिका का सामना ग्रामीणों को करना पड़ रहा था।
मलिनियां प्रधान राजदीप सिंह रिंकू के नेतृत्व में शनिवार को थाना पहुंचकर एक पत्र दिया गया था, जिसमें जर्जर बंधे को ठीक कराने के लिए सुहेली बैराज के बंद फाटकों को खुलवाने की बात कही गई थी। प्रशासन ने मामले को हल्के में लिया और रविवार को ही बंधा टूट गया। इस कारण कई गांवों की ओर सुहेली नदी के पानी ने अपना रुख कर लिया है। हालांकि पानी गांवों में घुसने से पहले ही मलिनियां प्रधान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बंधे को बोरियों, रस्सियों समेत किसी तरह से फिर से बनाया है।
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उधर, एसडीएम डॉ. अमरेश कुमार और तहसीलदार आशीष कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और बंधे का निरीक्षण किया। इसके बाद अधिकारियों ने सुहेली बैराज जाकर वहां बंद फाटकों को खुलवाया है, तब जाकर कुछ हद तक पानी का बहाव धीमा हुआ है।
मलिनियां प्रधान राजदीप सिंह रिंकू ने बताया कि जिस जगह पर बंधा कटा था वहां तो ठीक कर दिया गया है, लेकिन सुहेली नदी ने करीब एक किलोमीटर आगे बंधे को एक अन्य जगह से डैमेज कर दिया है। खबर भेजे जाने तक बंधे को दुरुस्त किए जाने का काम जारी था।
बंधा टूटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद तहसीलदार के साथ जाकर मौका मुआयना किया। बंधा दोबारा से दुरुस्त हो गया है। सुहेली बैराज जाकर बंद फाटकों भी खुलवा दिया गया है। पानी कम हो रहा है। कोई किसी प्रकार की हानि नहीं हुई है। - डॉ. अमरेश कुमार, एसडीएम पलिया
प्रशासन अगर ध्यान दे तो और मजबूत बन सकता है बंधा
पलियाकलां। इलाके के पर्वतिया घाट के पास करीब हर साल ही बंधा कहीं न कहीं से टूट जाता है। उसको ठीक करने का कार्य भी ग्रामीणों को खुद ही करना पड़ता है। इसको लेकर प्रशासन से ग्रामीणों को कोई मदद नहीं मिलती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन चाहे तो ठीक ढंग से बंधे का मजबूती से निर्माण हो सकता है।

क्या कहते हैं ग्रामीण
मलिनियां के कार्तिक का कहना है कि बंधे में कहीं भी कोई दिक्कत आती है तो प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं की जाती है। हर बार ही प्राइवेट बंधा बनाया जाता है, जिसको ग्रामीण खुद ही अपनी तरफ से श्रम और रुपये लगाकर हमेशा से ठीक आ रहे हैं।
मलिनियां के ही चतर सिंह ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों को बंधा डैमेज होने के अनुमान पर ही सूचना दे दी जाती है ताकि वह अपने स्तर से बंधे को बचाने का प्रयास करें, लेकिन प्रशासन अनदेखी कर देता है। जिसका खामियाजा किसानों को अपनी फसल में जलभराव के रूप में उठाना पड़ता है।
लोहरा वीरान बेला निवासी किसान गुरविंदर सिंह ने बताया कि रविवार को जो बंधे का हिस्सा कटा था उससे काफी ज्यादा मात्रा में पानी गांवों की ओर गया है, जिससे गांव पहुंचने से पहले ही पानी खेतों में भर गया। इससे फसलों के सड़ने की भी आशंका बनी हुई है।
लोहरा वीरान निवासी नारायण सिंह ने बताया कि मलिनियां प्रधान द्वारा प्रशासन को पहले ही बंधे के बारे में सूचना दे दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं किया। परिणामस्वरूप फसलों में जलभराव हो गया है, लेकिन प्रशासन से कोई उम्मीद नजर नहीं आती है।
बिहारीपुरवा गांव निवासी कालीचरण का कहना है कि बंधा करीब 14 ग्राम पंचायतों के सभी मजरों को मिलाकर 40-50 गांवों में पानी घुसने से रोकता है, लेकिन प्रशासन द्वारा बंधे के प्रति कोई खास कार्य नहीं कराया जाता है। जिससे ग्रामीणों को बाढ़ के समय खासा नुकसान उठाना पड़ता है।
सुहेली का जल स्तर बढ़ने से कई गांव चपेट में आए
पलियाकलां। सुहेली नदी का जल स्तर रविवार को फिर से बढ़ने लगा। नदी का पानी चंबरबोझ रपटा पुल पर करीब दो से तीन फुट तक चल रहा है। इसके अलावा आसपास इलाके के कई गांवों में भी पानी ने अपनी दस्तक दे दी है। दुधवा के जंगल में भी जलभराव हो गया है। उधर, शारदा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने से लोगों ने राहत महसूस की है।
बता दें कि सुहेली नदी का पानी रविवार को एक बार फिर से बढ़ने लगा है। चंबरबोझ गांव के पास पड़ने वाले रपटा पुल पर करीब दो से तीन फुट तक पानी भर गया है। बिलहिया, मकनपुर, बंशीनगर, निषादनगर घोला, चंबरबोझ समेत कई गांवों में बाढ़ के पानी ने अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी है। रपटा पुल पर तो तेज बहाव के साथ पानी बह रहा है। यहां बीते बृहस्पतिवार को एक युवक की डूबकर मौत भी हो गई थी।
ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से पुल के पास नाव भी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिसके चलते बिलहिया गांव जाने वाले ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, शारदा नदी के तेवर अब नरम पड़ते दिख रहे हैं। शारदा नदी रविवार को खतरे के निशान से केवल 18 सेंटीमीटर ही ऊपर बह रही है। जिसके चलते शारदा के आसपास गांवों के लोगों ने कुछ राहत की सांस जरूर ली है लेकिन अभी भी पूरी तरह से खतरा टला नहीं है।
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