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बाघ संरक्षण के प्रयासों में फिर जमी दुधवा की धाक

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दुधवा
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अंतरराष्ट्रीय मानकों पर देश के 14 टाइगर रिजर्व में खरा उतरा दुधवा

लखीमपुर खीरी। बाघ संरक्षण के मामले में दुधवा टाइगर रिजर्व ने एक बार फिर बाजी मारी है। बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए तय अंतरराष्ट्रीय मानकों पर देश के जो 14 टाइगर रिजर्व खरे उतरे हैं उनमें दुधवा टाइगर रिजर्व भी शामिल है। यह न केवल दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए, बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बाघों का प्राकृतिक घर माना जाता है। यहां की आबोहवा और जंगल की संरचना हमेशा से बाघों को रास आती रही है। करीब 2200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में 66 प्रतिशत वुडलैंड, 21 फीसदी ग्रासलैंड और 13 फीसदी वेटलैंड हैं। बाघों के भोजन के रूप में बड़ी संख्या में हिरन, जंगली सुअर आदि शाकाहारी जीव हैं। यहां की जलवायु बाघों के लिए बेहद अनुकूल है। दुधवा में ग्रासलैंड और वेटलैंड के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्राकृतवास, भोजन, पानी और सुरक्षा महत्वपूर्ण घटक हैं। बाघों के भोजन की बात करें दुधवा टाइगर रिजर्व में 5515 नीलगाय, 3344 पाढ़ा, 2538 बाराहसिंघा, 1270 काकड़, 21199 चीतल, 316 सांभर और 14413 जंगली सुअर हैं। पानी के लिए सुहेली, शारदा, गेरुआ, कौड़ियाला, मोहाना और दौदा नदियों के अलावा कई बड़ी झीलें, तालाब और वाटर होल हैं।

इस तरह तय होते है बाघ संरक्षण के मानक

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि बाघ रेंज वाले राष्ट्रों के वैश्विक समूह के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र विशेषज्ञ कंजरवेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स के तहत प्रभावी वन प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय मानक तय करता है। इसके कुल 50 मानक तय किए गए हैं। इन मानकों को पूरा करने के लिए अभिलेखीय साक्ष्य जुटाए जाते हैं। इनमें ग्लोबल टाइगर फोरम, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की वाइल्ड लाइफ विंग सहयोग करती है। कड़े परीक्षण के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व इन मानकों पर खरा पाया गया है।

बाघ संरक्षण और संवर्धन के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में किए जा रहे प्रयास अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे हैं। यह दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए गौरव की बात है। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व

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