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बच्चों और बुजुर्गों के लिए मुसीबत बना डायरिया, चार की मौत

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मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। सर्दी ने दस्तक दे दी है। सुबह-शाम सर्दी तो दिन में गर्मी हो रही है। इस मौसम में डेंगू के साथ डायरिया ने भी पांव पसार दिए हैं। पिछले 15 दिन में चिल्ड्रेन वार्ड से लेकर आइसोलेशन वार्ड में 60 पीड़ित भर्ती हुए। इलाज के दौरान एक बच्चे सहित चार लोगों की मौत हो गई है।
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जिला अस्पताल में डायरिया से पीड़ित बच्चे और बुजुर्ग रोजाना मरीज आ रहे हैं। गंभीर हालत में आने वाले बच्चे और बुजुर्गों को वार्ड में भर्ती कर इलाज हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि डायरिया का प्रमुख कारण गंदगी और दूषित खानपान है। इसलिए रहने सोने और खान पान की स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। पिछले 15 दिन में चिल्ड्रेन वार्ड में नौ बच्चे तो आइसोलेशन वार्ड में 50 महिलाएं और बुजुर्ग भर्ती हुए। इस दौरान चिल्ड्रेन वार्ड में 10 वर्षीय रतन और आईसोलेशन वार्ड में गीता देवी, मनोज और रतीराम की मौत हो गई।
कारण
- दूषित खान पान- इसका कारण रोटा वायरस है।
- पीने के लिए साफ पानी का प्रयोग करें।
- मिलावटी दूध और बाजार में खुुली बिकने वाली चीजें खाने से बचें।
- दांत निकलने पर बच्चे हर चीज मुंह में डालकर चबाते हैं। इसके गंदे होने से डायरिया की संभावना बनती है।
बचाव
- छह माह तक के शिशु को मां के दूध के सिवा कुछ न दें।
- इससे अधिक उम्र के बच्चों और बड़ों को ओआरएस घोल दें।
- दाल का पानी, चावल का मांड, दही केला एवं हल्का सुपाच्य भोजन दें।
- नारियल पानी पिलाएं।
- बुुजुर्गों के खान पान एवं बिस्तर आदि की सफाई पर विशेष ध्यान दें।
वायरस हैं जिम्मेदार
डायरिया का संक्रमण तीन तरह के वायरस फैलाते हैं। नोरो और रोटा-वायरस पांच साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। वहीं वयस्कों को भी यह अपना शिकार बना सकते हैं। एडेनो-वायरस किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए डायरिया का कारण बन सकता है।
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लक्षण
डायरिया का लक्षण बार-बार दस्त लगना। दस्त में पानी ज्यादा होना। दिन में चार-पांच या इससे भी ज्यादा बार दस्त होना। इसके बढ़ने पर आंतों में मरोड़ या फिर पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द भी होने लगता है। शरीर में पानी के साथ खनिज तत्वों की कमी होने पर मरीज बेहोशी की हालत में भी जा सकता है। यह स्थिति जानलेवा बन सकती है।
चपेट में आने का कारण
सबसे ज्यादा इसकी चपेट में पांच साल तक के बच्चे आते हैं, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में कमजोर होती है। दूषित खान पान इसका प्रमुख कारण है। गंदे हाथों से छूने, डायपर बदलते समय सफाई पर ठीक से ध्यान न देना, बच्चों का गंदी चीजें छूकर आंख, मुंह, नाक छूने व मलना संक्रमण का कारण है। बच्चों के बाद डायरिया की चपेट में आने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे ज्यादा है।
हाथ धोकर बच सकते हैं डायरिया से
डायरिया से बचने का सबसे आसान तरीका हाथों को सही तरीके से धुलना है, क्योंकि बच्चे हो या फिर बड़े हाथ धोने पर ध्यान नहीं देते। बाथरूम से आने के बाद, खेलने-कूदने के बाद, खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से न धुलना डायरिया सहित अन्य बीमारियों का प्रमुख कारण है। हाथों को एंटी बैक्टीरियल साबुन से झाग उठने तक कम से कम 30 सेकेंड तक रगड़कर धोएं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि बच्चों को लेकर साफ सफाई का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है, क्योंकि वह अज्ञानता वश दूषित पानी या फिर अन्य चीजें मुंह में डाल लेते हैं। छह माह के शिशु को सिर्फ माताएं स्तनपान ही कराएं। इससे बड़े बच्चों को ताजा खाना और साफ पानी के लिए दें। दस्त आदि आने पर बिना देर किए सरकारी अस्पताल आकर दिखाएं।
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