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कागजों के अभाव में विभाग ने सील की गुप्ता क्लीनिक

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demo photo - फोटो : amar ujala
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गर्भवती की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई
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एक माह पहले इसी अस्पताल पर पड़ा था छापा, महज नोटिस तक सिमट गई थी कार्रवाई
निघासन। कस्बे में संचालित गुप्ता क्लीनिक में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने कागज न मिलने पर कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया है। एक माह पहले ही तहसीलदार और स्वास्थ्य विभाग ने इसी अस्पताल में छापामारी की थी। उस वक्त भी अनियमितताएं मिलने पर नोटिस जारी किया था।
सिंगाही थाना क्षेत्र के कमलेश शर्मा ने बताया कि उसकी पत्नी सुनीता चार माह से गर्भवती थी। 26 मई को वह कस्बे के सिंगाही रोड स्थित गुप्ता क्लीनिक पर दवा लेने के लिए आई थी। आरोप है कि वहां पर मौजूद डॉ. जगत गुप्ता ने एबॉर्शन करने की बात कही। इसके बदले में उन्होंने दस हजार रुपये मांगे। कमलेश ने रुपये जमा करा दिए। उसके बाद सुनीता का एबॉर्शन किया गया। जब अधिक खून बहने लगा तो उसे आनन-फानन में लखीमपुर रेफर कर दिया।
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लखीमपुर में एक निजी अस्पताल में उसे दिखाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ के किसी अस्पताल मे लेकर गए। वहां पर डॉक्टर ने एबॉर्शन के दौरान ही नस कट जाने की बात कही। कमलेश ने बताया कि करीब दो घंटे तक चले इलाज के बाद उसकी पत्नी की मौत हो गई। पीड़ित ने मामले की शिकायत सीमएओ से की। सीएमओ के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के डॉ. प्रदीप सिंह की टीम ने मंगलवार शाम चार बजे गुप्ता क्लीनिक पर छापामारी की। इस दौरान वहां मौजूद डॉ. जगत गुप्ता क्लीनिक संबंधी कोई भी कागजात नहीं दिखा सके। डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि मृतक सुनीता के भर्ती होने के भी कोई कागज नहीं मिले हैं। टीम ने अस्पताल को सील करते हुए नोटिस किया है।
यदि पहले होती कार्रवाई तो नहीं जाती सुनीता की जान
स्वास्थ्य विभाग ने एक माह पहले तहसीलदार के साथ छापामारी कर इसी अस्पताल के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। जवाब देने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। दो साल पहले एडिशनल सीएमओ ने छापामारी की थी। उस समय भी कोई कागज नहीं मिले थे। वहां पर आशा बहुओं की एक डायरी मिली थी, जिसमें गर्भवती महिलाओं के भर्ती कराने का विवरण दर्ज था। तत्कालीन सीएमओ अश्वनी सिंह उस डायरी को साथ लेकर गए और 32 आशा बहुओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, हालांकि बाद में इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
सील होने के दूसरे दिन ही खुल जाते हैं अस्पताल
एक माह पहले कस्बे में छापामारी हुई थी। उस दौरान तीन अस्पतालों में कागज और डॉक्टर कुछ नहीं मिले थे। टीम ने तीनों अस्पतालों को सील कर दिया था। बाद में एक अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने दो दिन बाद खोल दिया था। सूत्र बताते हैं कि अस्पताल खुलवाने के दौरान उनसे एक शपथपत्र लिया जाता है कि वह अस्पताल का संचालन नहीं करेंगे, लेकिन खुलने के बाद से अब तक उसमें मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
चालक और अनपढ़ चला रहे हैं अस्पताल
कस्बे में अस्पतालों की एक बाढ़ सी आ गई है। अस्पताल संचालक पढ़े-लिखे और डिग्रीधारक नहीं, बल्कि टैक्सी चलाने वाले अनपढ़ अस्पताल का संचालन कर रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि सिंगाही रोड पर एक अस्पताल प्रसूता की मौत के बाद सील हुआ था। छह महीने बाद उस अस्पताल को फिर खोल दिया गया है। उस अस्पताल संचालक के पास भी कोई डिग्री नहीं है। वहां पर ऑपरेशन भी किए जाते हैं।
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मैंने एक सप्ताह पहले चार्ज संभाला है। अवैध अस्पतालों में छापामारी की जाएगी। अस्पताल के मानक और कागज पूरे होने के बाद ही सील हुए अस्पताल खोले जाएंगे। शीघ्र ही अन्य अस्पतालों पर भी छापामारी की जाएगी।
- पीके रावत, सीएचसी अधीक्षक
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