अप्रैल 2016 में भी जा चुकी है बाघ के हमले में एक जान
अप्रैल माह में ही बिहारीपुरवा मलिनिया निवासी अंजनि कुमार को एक बाघ ने मार डाला था। उसका क्षत विक्षत शव अगले दिन पड़ा मिला था। यह क्षेत्र शुक्रवार को हुई इस घटना के स्थल से करीब दो किलोमीटर दूर है और इससे इसके वही बाघ होने की संभावनाएं भी बढ़ गईं हैं। दबी जुबान से कुछ वन महकमें के अधिकारियों की माने तो उन्हें अंदेशा है कि यह वही हमलावर जानवर है। अभी चार दिन पूर्व भी यहां एक बाघ ने बेलाखुर्द निवासी एक व्यक्ति की गाय को मार डाला था। फिलहाल जो भी हो मामला संजीदा है और यहां के ग्रामीण अपने को खतरे में मान रहे हैं।
शुरू की गई जांच
वन महकमें में खैरहाना कांड के बाद जांच शुरू कर दी है। यह जांचा जाएगा कि हमलावर बाघ है या फिर तेंदुआ। फिलहाल पड़ताल शुरू हो गई और महकमें का कहना है कि जल्द ही यह पता लगाकर बाघ की तलाश शुरू कर दी जाएगी।
ग्रामीणों का अनुमान की हमलावर है बाघिन
ग्रामीणों में जो चर्चाएं हैं उनसे हमलावर जीव बाघिन है हालांकि अधिकारी अभी इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमेशा बाघिन पीछे से वार करती है और भिखारी के मामले में भी यही हुआ है।
बीते आठ महीने में बाघ हमलो में हुई नौ मौतें
22 फरवरी 2016- मैलानी रेंज की सलेमपुर बीट में बाघ हमले से कुकरा निवासी 50 वर्षीय रईश की मौत।
18 मार्च 2016-जटपुरा बीट में खेत की रखवाली कर रहे सोहनराभूड़ निवासी 50 वर्षीय तरसेम सिंह की बाघ हमले से मौत।
15 अप्रैल 2016 ढाका गांव में खेत के अंदर गेंहू फसल काट रही 15 वर्षीय किशोरी किरन की बाघ हमले से मौत।
07 जुलाई 2016-खरेहटा बीट में खरेहटा निवासी भोगन कश्यप की बाघ हमले में हुई मौत।
02 अगस्त 2016- खरेहटा बीट में 50 वर्षीय अंजनि की बाघ हमले में मौत।
17 अगस्त 2016- सुआबोझ वन ब्लाक में कपरहा कुंआ निवासी 13 वर्षीया किशोरी सरस्वती की बाघ हमले में मौत।
19 अगस्त 2016 छेदीपुर निवासी 56 वर्षीय टीकाराम की बाघिन हमले में मौत।
20 अगस्त 2016 छेदीपुर गांव निवासी बाबूराम की बाघिन हमले से मौत।
30 अगस्त 2016- भरिगवां निवासी 50 वर्षीय जानकी प्रसाद की बाघिन हमले से मौत।