सीमा पर नहीं थम रही खाद तस्करी
दिन छुपते ही नेपाल को शुरू हो जाती है तस्करी
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से तस्करी कर नेपाल भेजी जा रही खाद पर एसएसबी ने भले ही अंकुश लगा दिया हो, लेकिन साइकिलों और बाइकों से बड़ी संख्या में खाद अभी भी नेपाल जा रही है। सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियां खाद तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लगा पा रही हैं।
धान की रोपाई का सीजन शुरू हो गया है। भारत के साथ नेपाल के किसानों ने भी खेतों में धान की पौध लगानी शुरू कर दी है। भारत-नेपाल सीमा का अधिकांश क्षेत्र कोतवाली तिकुनियां के अंतर्गत है, जबकि अधिकतर खाद की दुकानें तिकुनियां कोतवाली की सीमा से सटे उमरा, निबौरिया, हरद्वाही बाजार चौराहा पर हैं। धान की रोपाई शुरू होने के कारण नेपाल में खाद की मांग तेजी से बढ़ी है। अमर उजाला ने 23 जून के अंक में ...खाकी-तस्कर गठजोड़ का किला तोड़ पाना आसान नहीं शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। खबर का असर यह हुआ कि ट्रॉलियों से नेपाल भेजी जा रही खाद की तस्करी पर तो अंकुश लगा है, लेकिन बाइकर्स और साइकिलों से तस्करी अभी जारी है। एक बाइक और साइकिल पर तस्कर चार से छह बोरी बांधकर नेपाल ले जाते हैं। इस कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि नेपाल में प्रति बोरी यूरिया और सुपर खाद की बोरी एक हजार रुपये में बिकती है, जबकि खाद की दुकानों से वह 350 रुपये प्रति बोरी लेते हैं। दुकान से लेकर सीमा की मोहाना नदी पार करने तक करीब 200 रुपये खर्च आता है। तस्करों को प्रति बोरी करीब 400 रुपये की बचत हो जाती है।
खाद की तस्करी रोकने के लिए जवान पूरी तरह से मुस्तैद हैं। तमाम दिक्कतों और संसाधनों कमी के चलते इस पर पूरी तरह से अंकुश लगा पाना संभव नहीं है।
- ललित कुमार, इंस्पेक्टर तृतीय बटालियन एसएसबी डांगा