इंडियन यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के एक अजीबोगरीब फरमान से महिला खिलाड़ियों में आक्रोश पनपने लगा है। नए नियम के तहत अब प्रतियोगिता में भाग लेने वाली महिला बॉक्सिंग खिलाड़ियों को प्रेगनेंसी टेस्ट देना होगा।
एआईयू के इस फरमान से कॉलेजों की महिला खिलाड़ी स्वयं को असहज महसूस कर रही हैं। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के खेल प्रभारी भी नए नियम से भौचक हैं।
पिछले महीने डीएस कॉलेज में अंतर महाविद्यालय बॉक्सिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसमें डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के विभिन्न जनपद के कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे।
इस प्रतियोगिता में टीकाराम गर्ल्स कॉलेज, एसवी कॉलेज, डीएस कॉलेज एवं एचएलडी कॉलेज की करीब आधा दर्जन छात्राओं ने विभिन्न वजन वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया था।
आगरा की भी कई छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन कर अपनी श्रेष्ठता साबित की थी। इन चयनित खिलाड़ियों को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जनवरी में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भाग लेना है।
एआईयू के फरमान के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने महिला खिलाड़ियों को मेडिकल, फिजिकल सर्टिफिकेट के साथ-साथ प्रेगनेंसी टेस्ट देने का भी निर्देश दिया है। इससे महिला खिलाड़ियों में खलबली मच गई है।
कुछ छात्राओं के अभिभावक तो खिलाड़ियों को आगे न खेलने का सुझाव दे रहे हैं। वहीं, कुछ ने अजीबोगरीब स्थिति का सामना करते हुए प्रेगनेंसी टेस्ट की रिपोर्ट बनवाकर विश्वविद्यालय के पास जमा कर दी है।