पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर नागरिक पुलिस और प्लाटून कमांडेंट पीएसी के 4010 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तीन माह में पूरी करनी होगी।
हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया रद करने संबंधी प्रदेश सरकार के तीन सितंबर 2013 और 24 सितंबर 2013 के आदेशों को रद करते हुए 19 मई 2011 की अधिसूचना के मुताबिक पुराने नियमों पर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
दारोगा भर्ती के अभ्यर्थियों विंध्यवासिनी तिवारी, मंजीत कृष्णा और अरविंद कुमार सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने शारीरिक परीक्षा के मानक में किए गए संशोधन को गलत ठहराया।
उन्होंने कहा कि सरकार जनहित में नियमों में बदलाव करने का दावा कर रही है, परंतु यदि दस किलोमीटर की कठिन दौड़ पूरी कर सफल हुए अभ्यर्थी चयनित किए जाते हैं तो पुलिस विभाग को अपेक्षाकृत अधिक योग्य कर्मचारी मिलेंगे। जबकि शारीरिक परीक्षा के मानकों को शिथिल किए जाने से नए नियमों में अभ्यर्थी अपेक्षाकृत आसान परीक्षा उत्तीर्ण करेंगे। याचियों की ओर से अधिवक्ता केएम अस्थाना, विनोद कुमार सिंह, सीमांत सिंह, सदानंद मिश्र आदि ने बहस करते हुए परीक्षा रद करने के निर्णय को मनमाना बताया।
पुलिस विभाग द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया कि नियुक्ति बोर्ड ने एक जनवरी 2013 को नियमावली में संशोधन कर प्रावधान किया था कि प्रारंभिक परीक्षा के प्रत्येक विषय में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक पाने वाले और औसत 50 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थी ही अगले चरण की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
इसकी वजह से तमाम अभ्यर्थी विषय में 40 प्रतिशत अंक नहीं पाने की वजह से असफल हो गए। इन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2013 के आदेश से नियुक्ति बोर्ड के संशोधन को रद करते हुए औसत 50 प्रतिशत अंक पाने वालों को शारीरिक परीक्षा में शामिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में कई याचिकाएं अभी लंबित हैं इसलिए जनहित में पूरी प्रक्रिया को रद करने का निर्णय लिया गया।