फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बचानी है पेड़ों की छांव, नहीं थकते डॉ. हरिओम के पांव

विज्ञापन
महिला को पौधा भेंट करते डॉ. हरिओम मिश्र। संवाद - फोटो : KUSHINAGAR
विज्ञापन
बचानी है पेड़ों की छांव, नहीं थकते डॉ. हरिओम के पांव
विज्ञापन

पर्यावरण संरक्षण के लिए हुई कोशिश का दिखने लगा नतीजा
कसया(कुशीनगर)। डॉ. हरिओम मिश्र की सोच से पर्यावरण संरक्षण को बल मिल रहा है। पीएचडी की उपाधि लेने के बाद शिक्षण कार्य से पर्यावरण संरक्षण के प्रति शुरू हुआ एक छोटा प्रयास अब कारवां बनता जा रहा है।
नगर के वार्ड नंबर-26 शहीद अमिय त्रिपाठी नगर निवासी डॉ. हरिओम मिश्र करीब 16 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। वह बताते हैं कि वर्ष 2005 में बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर के एनएसएस कैंप में सामाजिक कार्यों की चल रही गतिविधियों से उनके मन में पौधरोपण के प्रति एक प्रेरणा जागृत हुई। इसके बाद बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने की ठानी। पौधरोपण व पौधों के संरक्षण के लिए नई दिशा पर्यावरण सेवा संस्थान का गठन किया। इसमें नगर समेत क्षेत्र के गणमान्य लोगों को शामिल किया। अब पौधरोपण का अभियान आरंभ कर दिया है। वे लोगों को जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ, पुण्यतिथि व पर्यावरण संबंधी कोई महत्वपूर्ण अवसर या घर में छोटे बच्चों के जन्म लेने की खुशी में पौधा देने व उनके रोपण के काम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
विज्ञापन

डॉ. हरिओम करीब तीन वर्षों से लोगों को ऐसे मौके पर उनके घर पहुंचकर पौधे देते हैं अथवा उनके घर व आंगन में खाली जमीन में पौधरोपण कराते हैं। इसमें उनके संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों का भी योगदान रहता है। पौधरोपण के बाद दूसरे वर्ष उस अवसर पर किए गए पौधरोपण के बारे में जानकारी लेते हैं और पौधे को पुत्र की भांति देखभाल करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। पौधरोपण के उनके कार्य से लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। पौधरोपण के प्रति अब लोग खुद भी आगे आ रहे हैं। इस अभियान से लगभग हर वर्ग के लोग जुड़ रहे हैं। वे लोगों को पौधरोपण सिर्फ रस्म अदायगी तक सीमित न रहने देने की सलाह देते हैं।
विज्ञापन

खुद लगा चुके हैं 10 हजार पौधे
डॉ. हरिओम मिश्र बताते हैं कि अब तक वह खुद करीब 10 हजार पौधे लगा चुके हैं। इसके अलावा नई दिशा पर्यावरण सेवा संस्थान के बैनर तले पौधरोपण संग जन्मोत्सव जुलाई 2019 में आरंभ किया। उसके बाद समाज के अलग-अलग क्षेत्र के लोगों का रुझान उनके इस अभियान में जुड़ गया है। इसके चलते इस पौधरोपण अभियान को बल मिल रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें