बाढ़ का खतरा टला अब संक्रामक बीमारियों का खतरा
खड्डा क्षेत्र के महदेवा सहित अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक बीमारियां शुरू
डायरिया, बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम की चपेट में आ रहे लोग
खड्डा क्षेत्र में 2950 परिवार हैं बाढ़ से प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर/छितौनी। खड्डा क्षेत्र के सात गांवों में गंडक नदी के बाढ़ का खतरा अब काफी हद तक टल गया है, लोग पुन: अपने दैनिक कार्यों में जुट गए हैं, लेकिन लगातार जलभराव रहने से पानी दूषित हो गया है, जिससे वहां संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई लोग डायरिया, बुखार, सर्दी, जुकाम आदि बीमारियों की चपेट में हैं। प्रशासन के मुताबिक बाढ़ से 2950 परिवार प्रभावित हैं। बाढ़ के कारण खड्डा क्षेत्र के अनेक प्रमुख मार्ग कट गए हैं। संपर्क मार्गों की हालत भी चलने योग्य नहीं है। ऐसी दशा में सड़कों को बरसात बाद प्रशासन की तरफ से ठीक कराया जाएगा। मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंची और बाढ़ के कटान से हुए नुकसान के आकलन में जुटी है।
खड्डा क्षेत्र में पानी हटने के बाद संक्रामक बीमारियां पांव फैलाने लगी हैं। अकेले महदेवा गांव में कई लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में हैं।
बीते दिनों वाल्मीकिनगर बैराज से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंडक नदी में छोड़े जाने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। खड्डा ब्लॉक के सात गांव जलमग्न हो गए थे, इसे लेकर लोग परेशान थे। आनन-फानन में जिला प्रशासन की तरफ से बाढ़ शरणालय स्थापित कर बाढ़ पीड़ितों को ऊंचे स्थानों पर ठहराया गया था। एक सप्ताह बाद गांव से पानी निकलने पर पुन: बाढ़पीड़ित अपने घर वापस लौट गए हैं। इसके बावजूद उनकी मुश्किलें पीछा नहीं छोड़ रही हैं। महदेवा गांव में 12 से अधिक घरों के लोग बुखार, खांसी, उल्टी-दस्त और अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। इस गांव के मौलवी, झोली, ठग, मुअली आदि ने बताया कि वह खुद बुखार से पीड़ित हैं। बाढ़ के समय स्वास्थ्य कैंप में इलाज करा लेते थे। अब इलाज कराने के लिए रुपये नहीं हैं। जिनके पास थोड़ा बहुत पैसा है, वह निजी डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित विंध्याचलपुर में पहुंची राजस्व टीम
बाढ़ से हुई क्षति का आंकलन करने में जुटी राजस्व टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। एसडीएम के आदेश पर राजस्व टीम मंगलवार को दियारा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित विंध्याचलपुर में पहुंची। टीम बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे करने में जुट गई। सोमवार को इस गांव के लोगों ने खड्डा तहसील में पहुंच प्रदर्शन करने के बाद ज्ञापन सौंपा था। गंडक नदी के उस पार बायीं तरफ के शाहपुर गांव के विंध्याचलपुर टोले में कानूनगो रामनिवास पटेल के नेतृत्व में लेखपाल बृजनरायण सिंह, राजेश गुप्ता, विजेंद्र सिंह की टीम नाव से पहुंची। टीम ने ग्रामीणों के साथ भ्रमण कर फसलों को हुए नुकसान, खेत सहित फसल कटने, घरों के नदी में कटकर बह जाने आदि को सूचीबद्ध किया। टीम ने पाया कि विंध्याचलपुर के प्राथमिक विद्यालय व नदी के बीच मात्र 200 मीटर का ही फासला बचा है।
प्रधान प्रतिनिधि संतोष राय व ग्रामीण मधाई, रामशरन, रामाशीष, मुन्ना, रूदल, चोकट, हरिश्चंद्र, शंकर, हीरा, बिकाऊ, संजय, विजय, शिवपूजन, नगीना, कृष्णा, महंत, रमाकांत ने टीम को अपनी बर्बादी दिखाते हुए मदद की गुहार लगाई। इसके लिए शनिवार और सोमवार को ग्रामीण तहसील पहुंचकर गांव को बाढ़ प्रभावित का दर्जा देने की मांग किए थे। इसके बाद सोमवार को एसडीएम अरविंद कुमार ने राजस्व टीम गठित कर रिपोर्ट तलब किया था। टीम का नेतृत्व कर रहे राजस्व निरीक्षक रामनिवास पटेल व लेखपाल बृजनरायण सिंह ने बताया कि विंध्याचलपुर पहुंचकर सर्वे किया गया है। ग्रामीणों के फसल आदि के हुए नुकसान की रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी जाएगी।
गंडक में समाया ठोकर का एक हिस्सा
तमकुहीरोड। पिपराघाट गांव के तेजू टोले के सामने किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर के नोज पर मंगलवार को सुबह से अचानक कटान तेज हो गई। इससे ठोकर का एक हिस्सा नदी में समा गया। इससे वहां अफरातफरी मच गई। दूसरे ठोकर पर भी कटान जारी है। इससे गांववालों में बेचैनी बढ़ गई है। पिपराघाट के तेजू टोले में किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर और उसके बगल में स्थित सात दशक पुराने दूसरे ठोकर पर गंडक नदी का कटान पिछले एक सप्ताह से जारी है। इसके भय से बांध पर बसे 14 परिवार वहां से पलायन कर चुके हैं और कटान की जद में आने वाले एक दर्जन से अधिक पेड़ों को काटा जा चुका है। आलम यह है कि पुराने ठोकर पर दिन में मिट्टी से भरी बोरियों से जो भी बचाव कार्य होता है, वह रात में धंस जाता है। इससे इस ठोकर के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। मंगलवार को सुबह किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर के नोज पर अचानक नदी का कटान तेज हो जाने और ठोकर के नोज का एक हिस्सा नदी में समा जाने से वहां अफरातफरी मच गई। दूसरे ठोकर पर भी कटान की स्थिति बिगड़ने लगी है। इसे देखते हुए बाढ़ खंड विभाग की ओर से ठोकर पर बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दुबे, जेई राजेश सिंह, जेई संजय मौर्य, जेई सुनील यादव ने कैंप करना शुरू कर दिया है और मंगलवार से कटान रोकने को लेकर बोल्डर की डंपिंग भी शुरू करा दी गई है।