कचहरी टोला के लोगों की बेचैनी बढ़ी
तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े जा रहे पानी के डिस्चार्ज से गंडक का जलस्तर अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। इससे अहिरौलीदान के कचहरी टोला के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। 2017 में यह गांव गंडक के सीधे निशाने पर आ गया था। कई लोगों के घर, नदी की धारा में विलीन हो गए थे। जो घर बच गए थे, उनसे सटकर अब भी नदी बह रही है।
यूपी-बिहार सीमा पर स्थित अहिरौलीदान हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलने वाला गांव है। इस गांव के बैरिया टोला व कंचन टोला को पूरी तरह तो कचहरी टोला, खैरखुटा, मदरही, नोनियापट्टी का आंशिक रूप से गंडक वजूद मिटा चुकी है। 2017 में तो गंडक के वेग से कचहरी टोला में बड़ी-बड़ी इमारतों के साथ डेढ़ सौ से अधिक लोगों के घर नदी की धारा में विलीन हो गए थे। सिर्फ 88 लोगों को ही सरकारी मुआवजा मिल पाया था। अब भी कचहरी टोला में बांध के किनारे बलिस्टर सिंह, विक्रमादित्य सिंह, सकलदेव सिंह, सूर्यदेव सिंह, जवाहर सिंह, नंदकिशोर सिंह, राजकिशोर समेत कई लोगों के घर अवशेष के रूप में हैं, जिनसे सटकर गंडक नदी बह रही है।
ऐसे में इन लोगों का कहना है कि जब नदी कटान शुरू करती है तो बाढ़ खंड विभाग सक्रिय होकर मिट्टी से भरी बोरियों को डलवाकर अपने कर्तव्य की खानापूरी कर देता है। अब तक कटान रोकने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। इससे इस गांव के वजूद पर हमेशा खतरा बना रहता है। पिछले साल चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने से इस गांव में अफरा-तफरी मच गई थी। इस साल अब तक गंडक का डिस्चार्ज 60 से 80 हजार क्यूसेक के बीच ही पहुंच पाया है। ऐसे में लोगों को आशंका है कि डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ने के साथ ही एक बार फिर इस गांव का वजूद खतरे में पड़ सकता है। बांध की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
इस गांव के विश्वनाथ सिंह, पप्पू सिंह, ओसियर गुप्ता, संजय सिंह, ओमप्रकाश बैठा, सुजीत यादव, भगवान पासवान आदि ने बाढ़ खंड विभाग से समय रहते बाढ़ व कटान से बांध व घरों को बचाने के लिए कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम कराने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी कहा कि सभी संवेदनशील जगहों की निगरानी की जा रही है। फिलहाल कही भी बांध को कोई खतरा नहीं है।