पुरानी किताबों से हो रही पढ़ाई
तमकुहीराज ब्लॉक क्षेत्र में नहीं वितरित हुईं किताबें
संवाद न्यूज एजेंसी
रगड़गंज। तमकुहीराज ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में सरकार की तरफ से मिलने वाली निशुल्क किताबें अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में भी नहीं पहुंची हैं। इससे शिक्षक पुरानी किताबों से ही विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे हैं। स्कूलों में किताबें उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई करने और शिक्षकों को उन्हें पढ़ाने में परेशानी हो रही है।
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए सरकार की तरफ से प्रेरणा ऐप, कायाकल्प योजना समेत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। हालत यह है कि अक्तूबर का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बाद अभी तक तमकुही ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में सरकार की तरफ से मिलने वाली नि:शुल्क किताबें विद्यार्थियों तक अभी तक नहीं पहुंच सकी हैं। सोमवार को क्षेत्र के चार परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की गई। परसौनी खुर्द के प्राथमिक विद्यालय में कुल 115 बच्चों का नामांकन हुआ है। नामांकन के सापेक्ष 95 बच्चे मिले। विद्यालय में प्रधानाध्यापक मधु सिंह के अलावा सहायक अध्यापक मोनिका, सुमन और शिक्षामित्र शोभा बच्चों को पढ़ाती मिलीं। लेकिन इस विद्यालय में विभाग की तरफ से उपलब्ध होने वाली निशुल्क पुस्तकें अभी तक नहीं पहुंची हैं। यहां तैनात प्रधानाध्यापक मधु सिंह ने बताया कि विभाग की तरफ से किताबें नहीं मिलने से अभी पुरानी किताबों से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। बिहार बुजुर्ग के प्राथमिक विद्यालय में कुल 111 विद्यार्थी नामांकित हैं। इसमें से 80 छात्र-छात्राएं उपस्थित मिले। सहायक अध्यापक रवि कुमार यादव, देवेंद्र कुमार और शिक्षामित्र गीता खरवार बच्चों को पढ़ा रही थीं। बिहार खुर्द में नामांकित 143 में से 95 विद्यार्थी उपस्थित थे। यहां तैनात विकास दुबे, अर्जुन लाल, कविता यादव, शिक्षामित्र पूनम सिंह और किरण पांडेय छात्र-छात्राओं को पुरानी किताबों से ही पढ़ातीं दिखीं। इन विद्यालयों में भी अभी तक सरकार की तरफ से मिलने वाली नई किताबें नहीं आईं थीं। बिहार खुर्द स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी अभी तक किताबें नहीं मिली थीं। यहां पंजीकृत 76 में से 55 छात्र-छात्राएं मिले। प्रधानाध्यापक रविंद्र सिंह ने बताया कि किताबें नहीं मिलने से पुराने किताब से ही पढ़ाया जा रहा है। बीएसए विमलेश कुमार ने बताया कि जिले के अधिकांश स्कूलों तक पुस्तकें पहुंच गई हैं। जिन विद्यालयों में किताबें अभी तक नहीं पहुंची हैं, वहां एक से दो दिन में पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी।