दूर-दराज के क्षेत्रों से आयुर्वेदिक अस्पतालों में पहुंच रहे मरीज, एक रुपये में होता है पंजीकरण
तीन माह में कुशीनगर आयुर्वेदिक अस्पताल में 2,600 से अधिक मरीजों का हुआ उपचार
पडरौना। मौसम में बदलाव और बदलती जीवनशैली के कारण इन दिनों आयुर्वेदिक अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पहले जहां रोजाना करीब 25 से 30 मरीज पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 45 से 50 तक हो गई है।
इनमें पेट और त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक है। मरीजों को एक रुपये के पंजीकरण पर चिकित्सकीय परामर्श के साथ मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बदलते खान-पान और दिनचर्या के कारण गैस, कब्ज, भूख न लगना, एलर्जी और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में बदलाव के कारण खुजली और दाद जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीज भी बढ़े हैं।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल कुशीनगर में देवरिया और फाजिलनगर क्षेत्र से भी मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मंगलवार को नौतन हथियागढ़, सोहंग, जोकवा बाजार, भिसवा समेत आसपास के क्षेत्रों के मरीजों ने ओपीडी में उपचार कराया। इसके अलावा ढाढ़ा, हाटा और पडरौना स्थित आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी मरीज पहुंचे।
चिकित्सक गठिया और जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों को दवाओं के साथ नियमित कसरत और विशेष योगासन की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक दवाओं के सही सेवन के साथ शारीरिक गतिविधि करने से जोड़ों की जकड़न और दर्द में राहत मिल सकती है। वहीं, असंतुलित खान-पान को पेट और त्वचा संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल कुशीनगर के आंकड़ों के अनुसार जुलाई, अगस्त और सितंबर में 2,600 से अधिक मरीजों का उपचार हुआ। इनमें 50 प्रतिशत से अधिक मरीज पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे
मरीज बोले-
लंबे समय से भूख नहीं लग रही थी। कॉलेज से लौटते समय अक्सर जंक फूड खा लेते थे। चिकित्सक ने बाहरी खाद्य पदार्थों से परहेज करने और जीवनशैली में सुधार की सलाह दी।
-प्रवीण कुमार उपाध्याय, भिसवा
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कई माह से गैस और कब्ज की समस्या है। कई जगह उपचार कराने के बाद भी पूरी तरह राहत नहीं मिली। चिकित्सक ने दिनचर्या में सुधार और नियमित टहलने की सलाह देते हुए एक सप्ताह की दवा दी है।
-प्रवीन प्रसाद, नौतन हथियागढ़
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करीब एक वर्ष से नाक में खुजली, छींक और पानी आने की समस्या है। सुबह परेशानी बढ़ जाती है। चिकित्सक ने दवा के साथ मास्क लगाने और अनुलोम-विलोम करने की सलाह दी है।
-अनिल कुमार, मैनपुर डेलिहवा
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पेट में गैस की समस्या थी। चिकित्सक की सलाह और निर्धारित खुराक के अनुसार दवा लेने से पहले की अपेक्षा काफी राहत मिली है। मसालेदार खान-पान से परहेज की सलाह दी है।
-महेंद्र कुशवाहा, सबया
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कोट
पेट, त्वचा और जोड़ों के दर्द से संबंधित समस्याओं में दवा के साथ सही शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। मरीजों को नियमित कसरत और योगासन की सलाह दी जा रही है। संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
-डाॅ. संतराम मौर्य, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, कुशीनगर