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बाढ़ के कारण उपजे हैं ऐसे हाल, पशुपालकों की परेशानी बढ़ी

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गलाघोंटू से 50 से अधिक पशुओं की मौत, 100 बीमार
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खड्डा क्षेत्र के कई गांवों में पशुओं में फैली गलाघोंटू बीमारी
ग्रामीणों का आरोप, पशुपालन विभाग की नहीं मिल रही मदद
क्षेत्र के पशुपालकों के सामने चारे का भी है संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर/छितौनी। खड्डा क्षेत्र में गंडक का पानी हटने से बाढ़ पीड़ितों को राहत मिली है। लेकिन अब मवेशियों की जान पर आफत आ गई है। गलाघोंटू नाम की बीमारी से नौतार जंगल और बोधीछपरा सहित अन्य गांवों में 50 से अधिक पशुओं की मौत हो गई है, जबकि लगभग 100 बीमार बताए जा रहे हैं। पशुओं में इस रोग के साथ उनके चारे को लेकर पशुपालक परेशान हैं। क्योंकि चारा बाढ़ के पानी में नष्ट हो चुका है। फिर भी पशुपालन विभाग की कोई टीम पशुपालकों का हाल जानने नहीं पहुंची। बीते दिनों गंडक नदी के पानी ने खड्डा क्षेत्र के गांवों में काफी तबाही मचाई थी, जिससे लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। नदी में डिस्चार्ज कम होने के बाद गांवों से पानी निकल गया है और लोगों का जनजीवन पटरी पर आ रहा है। फिर भी खेतों में अभी भी पानी भरा है, जिससे काफी हद तक चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। इसके अलावा पशु गलाघोंटू बीमारी की चपेट में आ गए है। पशुपालकों के मुताबिक खड्डा ब्लॉक के बोधीछापर गांव में बुखार व गलाघोंटू से एक सप्ताह में 50 से अधिक भैंसों की मौत हो गई है तो वहीं 100 से अधिक बीमार हैं। पशुपालन विभाग से सहयोग नहीं मिलने से पशुपालक निजी पशु चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं। बोधीछापर के पशुपालक सुरेश यादव ने बताया कि उसके पास 40 भैंस थीं, लेकिन एक सप्ताह के भीतर 15 की मौत हो चुकी है और छह बीमार हैं। निजी पशु चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं। हालांकि उससे बहुत फायदा नहीं हो रहा है। बीमार भैंसों की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। पशुपालक दशरथ यादव ने बताया कि बीते रविवार व सोमवार को उनकी छह भैंस बीमार पड़ीं। जानवरों को बुखार हुआ और चारा खाना छोड़ दीं। एक-एक कर छह ने दम तोड़ दिया। सुरेंद्र यादव ने बताया कि बीते शनिवार को उनकी दो भैंसों में गलाघोंटू और बुखार का लक्षण दिखा। डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे कि एक-एक कर अन्य जानवर भी चपेट में आ गए। 15 भैंसें मर गईं है, अभी भी पांच बीमार हैं। सुग्रीव यादव ने बताया कि उनके पास 30 भैंस हैं। उनमें से चार शुक्रवार को तो दो की रविवार को मौत हो गई। वहीं छह भैंस अभी भी बीमार हैं। उनका इलाज करा रहे हैं। अभी तक उनके पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है। इस बाबत प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उज्जवल खरवार का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। ऐसा है तो इलाज के लिए तत्काल टीम भेजी जाएगी।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की टीमों को लगातार नजर रखने के लिए बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात किया गया है। ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाले संक्रामक व अन्य रोगों से इंसान और पशुओं को बचाया जा सके। जिले स्तर के उच्चाधिकारियों की टीम को निर्देश दिया जाएगा कि वह बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर निरीक्षण करें और बीमार पशुओं का उपचार कराएं।
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- ेेएस. राजलिंगम, डीएम
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