पटाखों के लिए सजा बाजार, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
- जिले में 276 स्थानों पर लगाई गई हैं पटाखों की दुकानें
- त्वचा और आंखों के डॉक्टर बोले, सावधानीपूर्वक जलाएं पटाखे, शरीर के साथ आंखों को हो सकता है नुकसान
- अग्निशमन विभाग ने प्रमुख स्थलों पर लगाई हैं गाड़ियां
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। हर्षोल्लास के त्योहार दीपावली को सकुशल संपन्न कराने के लिए पडरौना शहर सहित जिले भर में पटाखे की दुकानों की खातिर ऐसे स्थलों का चयन किया गया है, जो आबादी से दूर हों। जिले भर में कुल 276 दुकानों को लगाने का अग्निशमन विभाग ने लाइसेंस दिया है। साथ ही यह हिदायत भी दी है कि न तो वहां पटाखे फोड़े जाएं और न ही आसपास किसी मकान में विस्फोटक रखा जाए। आग से बचाव के सभी जरूरी उपकरण रखे जाएं तथा प्रत्येक दुकान के बीच की दूरी तीन मीटर से कम न हो। पोस्ट कोविड मरीजों से लेकर पटाखे से झुलसे लोगों को बचाव के लिए भी डॉक्टरों ने सुझाव दिए हैं।
अग्नि शमन अधिकारी इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि पडरौना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत नगर के जूनियर हाईस्कूल के मैदान में 45, जटहां बाजार थाना क्षेत्र के भैरोगंज में चार, कसया में 35, हाटा में 43, अहिरौली में छह, सुकरौली में नौ, बोदरवार में सात, रामकोला में दस, कप्तानगंज में 12, कुबेरस्थान में 15, खड्डा में 12, सेवरही में 21, तरयासुजान में 11, पटहेरवा में 14, विशुनपुरा में 13 और तुर्कपट्टी में 19 दुकानें लगाई गई हैं। इस तरह कुल 276 दुकानें लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि पूरी कोशिश की गई है कि यह दुकानें निर्जन स्थानों पर लगें, ताकि पटाखों की वजह से कोई दुर्घटना न हो।
एफएसओ ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक दुकान के पास पटाखों की दुकानें टिनशेड में लगाने, दो बाल्टी बालू, दो ड्रम पानी व खाली बाल्टी, अग्निशमन यंत्र रखा जाना अनिवार्य है। इसके अलावा किसी भी दुकान पर न बच्चे रहेंगे न बुजुर्ग अथवा विकलांग व्यक्ति। पटाखा बिक्री स्थल से 100 मीटर की परिधि में किसी विस्फोटक का नमूना चेक नहीं किया जाएगा। दुकानों में आपस के बीच की दूरी तीन मीटर रहेगी।
शहर में नहीं हैं ग्रीन पटाखे
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ग्रीन पटाखों के उपयोग पर जोर दे रही है, लेकिन दीपावली के अवसर पर कहीं भी ग्रीन पटाखे नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में लोग जो पटाखे बाजार में उपलब्ध हैं, वही खरीदने को विवश हैं।
प्रमुख स्थानों पर खड़ी रहेंगी अग्निशमन विभाग की गाड़ियां
एफएसओ ने बताया कि पडरौना कोतवाली में एक, कप्तानगंज में एक, हाटा और कसया में एक-एक गाड़ियां अग्निशमन दस्ते के साथ खड़ी रहेंगी। इसके अलावा सेवरही, खड्डा और अन्य थाना क्षेत्र में संबंधित पुलिस का सहयोग लिया जाएगा। ताकि पटाखों की वजह से कोई घटना हो तो तत्काल अग्निशमन विभाग की टीम निरोधात्मक कार्रवाई कर सके। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि अपनी निगरानी में ही बच्चों से पटाखे जलवाएं। ढीले या लहराते कपड़े पहनकर पटाखे जलाने से बचें।
त्वचा रोग विशेषज्ञ बोले
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि पटाखे जलाते समय सबसे अधिक खतरा त्वचा और आंखों को होता है। यदि पटाखे हाथ में फट जाएं या हाथ झुलस जाए तो तत्काल बारूद को साफ पानी से धो लें। जले हुए स्थान पर एंटीबायोटिक या एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं। चोट ज्यादा हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचे। भरसक ग्रीन पटाखे जलाएं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ बोले-
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि सबसे अधिक नुकसान तेज ध्वनि वाले पटाखों से होता है। तेज आवाज वाले पटाखों से ही दुर्घटना होने की आशंका रहती है। थोड़ी सी असावधानी चेहरा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकती है। गंभीर लापरवाही कभी कभी जानलेवा हो जाती है। उन्होंने कहा कि पटाखे पूरी सावधानी से जलाएं। बच्चों को तेज आवाज वाले पटाखों से दूर रखें। उन्होंने कहा कि यदि पटाखे जलाते समय चेहरा जल जाए या आंखों में बारुद पड़ जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएं। आंखों को किसी भी हाल में रगड़ें न, क्योंकि इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। परेशानी ज्यादा हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचें।
पोस्ट कोविड मरीज पटाखे जलाते समय मास्क का करें उपयोग-
पडरौना शहर के चिकित्सक डॉ. संदीप अरुण श्रीवास्तव बताते हैं कि वैसे तो पटाखों का धुआं हर किसी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन पोस्ट कोविड मरीज विशेष सावधानी बरतें। अस्थमा और कोविड से ठीक हुए मरीजों के लिए यह जरूरी है। पोस्ट कोविड मरीजों अथवा ऑक्सीजन की कमी के बाद स्वस्थ हुए मरीजों का पूर्व में बीमारी के दौरान फेफड़ा प्रभावित हुआ है। ऐसे में बारूद का धुआं उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे लोगों के लिए सुझाव है कि पटाखे जलाते समय मास्क अवश्य लगाएं।