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गजरा के दो आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटक रहा था ताला,

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दो आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटक मिला ताला
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राजमंदिर गांव के केंद्र पर तीन में से एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिलीं
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज। क्षेत्र के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की बात छोड़ दें तो ज्यादातर मनमानी तरीके से संचालित हो रहे हैं। कोरोना महामारी के खतरे की आशंका को देखते हुए सप्ताह में सिर्फ दो दिन सोमवार और बृहस्पतिवार को आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाने का निर्देश है, लेकिन इन दो दिनों में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्रों पर नहीं दिखीं। बृहस्पतिवार को कप्तानगंज क्षेत्र के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की गई तो उनमें कुछ केंद्र या तो बंद मिले अथवा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद नहीं थीं। एक केंद्र का अपना भवन नहीं होने की वजह से जूनियर हाईस्कूल में संचालित मिला।
निजी विद्यालयों की तरह नन्हे-मुन्ने बच्चों को प्री-प्राइमरी की शिक्षा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को भी हाईटेक करने में लगी है। इसी उद्देश्य से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मॉर्टफोन देने से लेकर उन्हें अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
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बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे बभनौली के आंगनबाड़ी केंद्र में तो स्थिति कुछ ठीक मिली। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उर्मिला देवी बच्चों को पढ़ाती मिलीं। इस केंद्र पर गांव के 20 बच्चों का पंजीकरण है, मौके पर 17 बच्चे मौजूद थे। ग्राम पंचायत गजरा में संचालित दोनों आंगनबाड़ी केंद्रों पर बृहस्पतिवार को ताला बंद था। इस वजह से बच्चे भी केंद्र पर मौजूद नहीं थे। ग्राम पंचायत राजमंदिर के आंगनबाड़ी केंद्र का खुद का भवन नहीं है। यह जूनियर हाईस्कूल में संचालित होता है। यहां दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तैनाती है, लेकिन बृहस्पतिवार को केंद्र पर कोई मौजूद नहीं था। इसी तरह कोटवा में कुल चार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात हैं। बृहस्पतिवार को यहां सिर्फ तारा देवी मौजूद रहीं। इस केंद्र पर कुल 38 बच्चों का पंजीकरण है, लेकिन मौके पर केवल 15 बच्चे ही उपस्थित थे।
इस संबंध में मुख्य सेविका मनीषा सिंह ने बताया कि गजरा के आंगनबाड़ी केंद्र के बंद होने का कारण संबंधित कार्यकर्ताओं से पूछा जाएगा। इसके अलावा राजमंदिर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नवरात्र उपवास थीं, वह उस समय बगल के मंदिर में पूजा करने चली गई थीं। राजमंदिर की ग्राम प्रधान नीलम साहनी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र का खुद का भवन नहीं है। इसलिए जूनियर हाईस्कूल में संचालित होता है। आंगनबाड़ी केंद्र के भवन निर्माण के लिए ग्राम सभा समिति से प्रस्ताव भेजा जाएगा।
अभी कप्तानगंज में नया चार्ज मिला है। चार्ज लेने के कुछ दिन बाद से ही चिकित्सकीय अवकाश पर हूं। अवकाश से वापस आने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति देखूंगी। - रोमा सिंह, सीडीपीओ कप्तानगंज
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212 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास नहीं है भवन
कप्तानगंज। क्षेत्र के 262 आंगनबाड़ी केंद्रों में से केवल 50 के पास ही विभागीय भवन हैं। शेष केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अथवा पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर कुल 43 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद रिक्त है। कप्तानगंज क्षेत्र में इस साल छह वर्ष तक के 13146 बच्चों और 5353 धात्री महिलाओं का पंजीकरण हुआ है। इनकी देखभाल और पुष्टाहार वितरण की व्यवस्था के लिए 262 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए हैं। तीन आंगनबाड़ी केंद्र का भवन अभी निर्माणाधीन है। शेष 209 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्राथमिक विद्यालय और पंचायत भवनों में हो रहा है। संवाद
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