जनपद में श्रद्धाभाव से हुई गोवर्धन पूजा
पडरौना (कुशीनगर )। जनपद के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा पारंपरिक रीति रिवाज व श्रद्धाभाव से मनाई गई। शहर के विभिन्न मोहल्लों और मंदिर परिसर में पूरी आस्था के साथ गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर विधि विधान से पूजा की गई। गांवों में समूह बनाकर महिलाओं और युवतियों ने एक दूसरे के घर जाकर गोवर्धन पूजा की। उसके बाद भगवान गोवर्धन को भोग लगाया। इसके बाद युवतियों और महिलाओं ने विधि विधान से पूजन कर भाइयों की लंबी उम्र की कामना की।
शहर में गोवर्धन पर्व को लेकर शनिवार सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गईं। शहर के बुढ़िया माई मंदिर, दुर्गा मंदिर, जगदीपुरम कॉलोनी स्थित हनुमान मंदिर समेत अन्य मंदिर परिसर और विभिन्न मोहल्लों में गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाई गई। महिलाओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से गोवर्धन की पूजा-अर्चना की। कुछ स्थानों पर महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर गीत भी गाया। महिलाओं ने अपने परिवार की खुशहाली की मनौतियां मांगी। शहर के मारवाड़ी युवा मंच की चेतना शाखा की तरफ से साहबगंज स्थित पिंजरापोल गोशाला परिसर में गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। छप्पनभोग लगाकर गोवर्धन की परिक्रमा की। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन भी किया। अंत में आरती कर प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। उजारनाथ प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के सभी गांव में भैया दूज एवं गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाई गई। युवतियों ने गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा- अर्चना की तथा अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना की। लोगों में मान्यता है कि गोवर्धन पूजा के बाद शादी-विवाह अन्य शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो जाते हैं। युवतियां नए परिधानों में सजधज कर फल, मिठाई व पूजा सामग्री के साथ गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान की प्रतिकात्मक प्रतिमा के पास पहुंचती हैं। यहां गोवर्धन की विधिविधान से पूजा कर भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार सेवरही क्षेत्र में शनिवार को भैयादूज का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसके लिए विभिन्न गांवों में गोबर से उपासना स्थल बनाए गए थे, जहां भाइयों की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाओं और लड़कियों ने गोवर्धन की पूजा- अर्चना की। इसी तरह सेवरही क्षेत्र के सुमही संतपट्टी, दुबौली, अवदान टोला, पकड़ीयार पूरबपट्टी, विरवट कोंन्हवलिया, राजपुर बगहा, दोमाठ, व्रह्मपुर, रानीगंज, पिरोजहा, दाहूगंज, बैजूपट्टी, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, चैनपट्टी, अहिरौलीदान, सिसवा नाहर, बेदुपार, बाकखास, बाघाचौर, तिवारीपट्टी, बभनौली, मिश्रौली, दौनाहा, कत्तौरा, पिपराघाट, राजपुर खाश समेत सभी गांव में शनिवार को भैया दूज व गोधन कूट का पर्व परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
इसलिए होती है गोवर्धन पूजा-
पं. हरिओम मिश्र ने बताया कि गोवर्धन पूजा के बारे में मान्यता है कि देवराज इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने उनकी पूजा करने के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। जब इंद्र को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने पूरे गोकुल को नष्ट करने व कृष्ण को अपनी शक्तियों का परिचय देने के लिए भारी बारिश करा दी। गांव में हाहाकार मच गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया और ग्रामीणों की रक्षा की। तभी से भगवान श्रीकृष्ण को गोवर्धन के नाम से भी पूजा जाता है।