नदी में दो लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंचा पानी का डिस्चार्ज, कटान का खतरा बढ़ा,
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा/तमकुही रोड। नेपाल में बारिश के चलते गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज दो लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 50 सेमी ऊपर पहुंचने बाढ़ प्रभावित लोग सहमे हुए हैं। इससे कटान का खतरा भी बढ़ गया है।
बुधवार की सुबह छह बजे वाल्मीकि बैराज से 1,58,900 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। दोपहर 12 बजे 2,03,500 क्यूसेक हो गया। इसके चलते भैंसहा गेजस्थल पर शाम चार बजे जलस्तर चेतावनी बिंदु से 50 सेंटीमीटर 95.50 मीटर पहुंच गया। यह जलस्तर खतरे के निशान 96.00 मीटर से 50 सेमी नीचे है। आम तौर पर 15 अक्तूबर को बरसात सीजन का समापन मान लिया जाता है। इसके बाद नदी का जलस्तर नीचे चला जाता है। इससे बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, महदेवा, सालिकपुर आदि गांव में एक बार पुन: बाढ़ का भय सताने लगा है। क्षेत्र के जवाहिर, बेचन, हरिशंकर सिंह, नरेश, लक्ष्मण, मदन आदि किसानों ने बताया की बाढ़ और अतिवृष्टि से पहले ही गन्ना और धान की फसल चौपट हो गई है। जो कुछ बच गया था, उसको सहेजने में जुटे थे। लेकिन गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ने से एक फिर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार, गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से नरवाजोत व एपी बांध पर नदी का दबाव बढ़ने लगा है। जिससे कचहरी टोला, डीह टोला, नोनियापट्टी, बाघा चौर, जंगली पट्टी, चैनपट्टी आदि संवेदनशील स्थानों पर एक बार फिर कटान का खतरा मंडराने लगा है। एपी बांध के किनारे बसे जयप्रकाश सिंह, सुजीत यादव, पप्पू सिंह, बृजकिशोर साहनी, यशवंत सिंह, जेपी निषाद, विनोद सिंह, रविंद्र सिंह, प्रभुनाथ यादव, संजय सिंह, ध्रुव निषाद, सकलदेव सिंह, अवधकिशोर सिंह, दुधनाथ शर्मा, विश्वनाथ सिंह आदि ने कहा कि गंडक नदी बिल्कुल शांत हो गई थी। डिस्चार्ज भी सामान्य हो गया था। दोबारा गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़ने से कटान का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी ने बताया कि फिलहाल बांध पर कोई खतरा नहीं है। सभी संवेदनशील जगहों पर चौकसी बरती जा रही है।