फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कागज में कुपोषण दूर कर रहे सहजन के पौधे

विज्ञापन
विज्ञापन
कागज में कुपोषण दूर कर रहे सहजन के पौधे
विज्ञापन

बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन लगे थे
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जनपद के नौनिहालों को कुपोषण से बचाने के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन के पौधे लगाने के आदेश दिए गए थे। पौष्टिकता से भरपूर इन पौधों को लगाने का उद्देश्य था कि आंगनबाड़ी केंद्रों में तैयार हुए सहजन को बच्चों के आहार में प्रयोग किया जाए। ताकि बच्चे कुपोषण से बच सकें, लेकिन यह पौधरोपण ज्यादातर स्थानों पर केवल कागजों में ही सिमटकर रह गए। यहां तक कि डीपीओ भी इस बात से अनजान हैं कि कितने केंद्रों पर यह पौधे लगाए गए थे और उनकी स्थिति क्या है?
जनपद में 4134 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। इनमें खड्डा क्षेत्र में 273, हाटा में 263, पडरौना में 453, दुदही में 333, फाजिलनगर में 256, कप्तानगंज में 262, कसया में 236, मोतीचक में 238, नेबुआ नौरंगिया में 254 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसी तरह रामकोला क्षेत्र में 273, सेवरही में 308, सुकरौली में 241, तमकुही में 319, विशुनपुरा में 300 और शहरी क्षेत्रों में 125 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इतने अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में सिर्फ 323 केंद्र विभाग के अपने भवनों में संचालित हो पा रहे हैं। इसमें से 3520 ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जो प्राथमिक विद्यालयों के अतिरिक्त कक्षों में संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 291 पंचायत भवनों में संचालित हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में ढेर सारे ऐसे गांव हैं, जहां पूर्व में सर्वेक्षण के दौरान कुपोषित बच्चे मिल चुके हैं। ऐसे बच्चों की उचित देखभाल, सही पोषण और चिकित्सा सुविधा के लिए जिला अस्पताल में पोषण एवं पुनर्वास केंद्र बना है। इसके अलावा कुपोषित बच्चों को पौष्टिकता से भरपूर आहार देने के लिए करीब दो साल पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन के पौधे लगाने के आदेश थे। उस समय जोर-शोर से इनके पौधरोपण पर जोर दिया गया था, लेकिन मौजूदा समय में ज्यादातर पौधे नदारद हैं। हालांकि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी शैलेंद्र राय का कहना है कि वह जुलाई में पदभार संभाले हैं। दो साल पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन के पौधे लगाने का आदेश आया था। इस समय इन पौधों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें