नोटबंदी के बाद से अब तक शहर के एटीएम पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाए हैं। हालत यह है कि करीब 30 एटीएम में से अब तक तीन चार एटीएम ही चालू हो पाए हैं। मकर संक्रांति का त्योहार के चलते शनिवार को बैंकों में तो सार्वजनिक अवकाश था, लेकिन एटीएम भी बंद थे। जो दो-तीन एटीएम खुले थे वहां रुपयों के लिए परेशान लोग लम्बी लाइनों में धक्के खा रहे थे। यहां भी कुछ ही लोगों को रुपये मिल पाए।
बीते आठ नवंबर की रात नोटबंदी होने के साथ ही पडरौना शहर के एटीएम का दशा खराब हो गई। पहले 50 दिन में तो सिर्फ एचडीएफसी समेत दो-तीन प्राइवेट बैंकों के एटीएम ही चालू हुए। जनवरी महीने में पीएनबी व स्टेट बैंक समेत अन्य बैंकों के एटीएम का भी शटर उठा लेकिन एकाध दिन बाद ही उनका शटर भी गिर गया। बैंकों की हालत भी अब तक सामान्य नहीं हो पाई है। बहुत जरूरत होने व जान पहचान के आधार पर ही बैंक लोगों को 10 से 15 हजार रुपये तक दे रहे हैं। हालांकि लीड बैंक का दावा है कि अब तक जिले में पांच सौ करोड़ रुपये बैंकों को मिल चुके हैं और अधिकांश रुपये बंट भी गए हैं, लेकिन हालात में बहुत ज्यादे फर्क नहीं पड़ा है। शनिवार को मकर संक्रांति का त्योहार होने के चलते शहर के सभी बैंक बंद रहे। परंतु यहां विभिन्न बैंकों के करीब 30 एटीएम में से केवल एचडीएफसी और एक्सिस बैंक के एटीएम ही खुले थे। त्योहार होने के चलते रुपयों की आवश्यकता होने के कारण शहर सहित दूर दराज से आए लोगों की उम्मीद इन्हीं दो एटीम पर टिकी थी। जिससे इन दोनों एटीएम पर लंबी कतार लगी थी। रुपये खत्म होने की आशंका के चलते लाइन में लगे लोग धक्का-मुक्की करते नजर आए। हालांकि यहां से भी बहुत लोगों को निराश ही लौटना पड़ा।