दिव्यांग बच्चों की तलाश करेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
तीन से पांच वर्ष के बच्चों का जुटाएंगी ब्योरा
पडरौना। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिले के तीन से पांच वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों की तलाश करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनकी ओर से चिह्नित दिव्यांग बच्चों का स्वास्थ्य विभाग परीक्षण करेगा। इसके बाद उन्हें प्राथमिक शिक्षा के साथ ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए समेकित शिक्षा विभाग की तरफ से जिला स्तर के साथ ही नगर व ब्लॉक स्तर पर कार्यशाला आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। 14 एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स परसन) और 28 स्पेशल एजुकेटर समेत कुल 44 मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित किए जाएंगे, जो ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे।
समेकित शिक्षा के अंतर्गत पंजीकृत छह से 14 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों के चिकित्सकीय परीक्षण के साथ शिक्षा व अन्य कार्यों पर सालाना तीन हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। अब तीन से पांच वर्ष के दिव्यांग बच्चों को भी चिकित्सकीय परीक्षण, प्राथमिक शिक्षा व अन्य सहयोग देने की तैयारी की जा रही है। यू-डॉयस डाटा में छह से 14 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को जोड़ा गया है। अब इसी डाटा में तीन से पांच वर्ष के दिव्यांग बच्चों को शामिल किया जाएगा। प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में संचालित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के 1125 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तीन से पांच वर्ष के दिव्यांग बच्चों का ब्योरा जुटाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक बलवंत बहादुर ने बताया कि जिला व ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशाला कराने के लिए शासन ने 15 फरवरी तक का समय दिया है। जिला स्तर पर प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर को तैयार किया जाएगा। इसमें सभी ब्लॉक से एक-एक एआरपी और दो-दो स्पेशल एजुकेटर शामिल होंगे।
कोट
दिव्यांग बच्चों का जीवन स्तर सुधारने पर शासन स्तर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग में संचालित समेकित शिक्षा की तरफ से अभी तक यू-डॉयस पोर्टल पर छह से 14 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों का ब्योरा उपलब्ध होता था। अब तीन से पांच वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों का डाटा भी अपलोड किया जाएगा। इसके लिए बीईओ और सीडीपीओ की निगरानी में जिला व ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कराने की तैयारी की जा रही है।
विमलेश कुमार, बीएसए