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पांच माह पहले आग से बर्बाद हुई थी किसानों की गेहूं की फसल

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मुआवजे की मरहम से 131 अग्निपीड़ित किसान वंचित
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मुआवजे के लिए तहसील का चक्कर लगा रहे हैं किसान
राजस्व विभाग की रिपोर्ट पर मंडी समिति से मिलता है मुआवजा
हाटा तहसील क्षेत्र के सात गांवों के 131 किसानों की जली थी फसल
मनोज कुमार गिरि
हाटा। अग्निकांड में अपनी गेहूं की फसल गंवा देने वाले किसान पांच माह बाद भी मुआवजे के लिए हाटा तहसील का चक्कर लगा रहे हैं। घटना के वक्त जनप्रतिनिधियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की ओर से मिला आश्वासन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। राजस्व विभाग की तरफ से इसकी रिपोर्ट मंडी समिति को भेजी गई है, लेकिन पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।
बीते मार्च माह में गेहूं की खड़ी फसल में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं हुई थीं, जिसमें बहुत से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल आग की भेंट चढ़ गई थी। ऐसी घटनाओं से पीड़ित किसानों को मुआवजा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन उन योजनाओं का लाभ बड़ी मुश्किल से किसानों तक पहुंच पाता है। बीते मार्च के दौरान हाटा तहसील क्षेत्र के सात गांवों में गेहूं की फसल में आग लग गई थी। इसमें 131 किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल राख हो गई थी। अगलगी के बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया था।
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नियम के मुताबिक राजस्व विभाग की ओर से इस रिपोर्ट को मंडी समिति को भेज दिया गया, ताकि किसानों को उनके रकबे के हिसाब से मुआवजे का भुगतान कर उनके नुकसान की भरपाई की जा सके। लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी किसी किसान को मुआवजा की धनराशि नहीं मिल पाई। हाटा तहसील क्षेत्र के बरवा गांव के किसान धर्मराज सिंह, रक्षा यादव, तेज बहादुर और गोपालपुर बिरैचा गांव के अवधेश ने बताया कि मार्च में जब उनके गेहूं की फसल पककर तैयार हो गई थी, उसी दौरान खेत के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर खेत में गिर गया था। इससे निकली चिंगारी से गेहूं की फसल जल गई थी। इस घटना में लोगों की फसल के साथ-साथ 25 किसानों की 20 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई थी। इसी तरह हाटा तहसील क्षेत्र के ही पिड़रा, पिपरा तिवारी, गोपालपुर बिरैचा, देवरिया देहात और झनझनपुर आदि गांवों के किसान आग से प्रभावित हुए थे। उस समय हाटा क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन आश्वासन के अलावा अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। अफसरों ने उन्हें बताया कि रिपोर्ट मंडी समिति को भेज दी गई है। मुआवजा वहीं से मिलेगा। इसके बाद किसानों ने हाटा में मंडी समिति का दफ्तर खोजने की कोशिश की तो पता चला कि इसका दफ्तर देवरिया जिले में है। संवाद
फसल के नुकसान का आकलन कर उसकी रिपोर्ट मुआवजा भुगतान के लिए मंडी समिति को भेज दी गई है। किसानों की ओर से भी ऑनलाइन आवेदन कराने का नियम है। किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए मंडी समिति के अधिकारियों से बात की जाएगी।
- सुमित सिंह, तहसीलदार हाटा
फसल बर्बाद होने के एक माह में निर्धारित प्रारूप पर किसानों को मुआवजे के लिए आवेदन करना होता है। जो कि समय से विभाग को नहीं मिला है। मुआवजा नहीं मिलने का यह एक कारण हो सकता है। पूरे मामले को दिखवाया जा रहा है।
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- पौहारी शरण, मंडी समिति के कार्यवाहक सचिव
मुआवजा दिलाया जाएगा
डीएम एस. राजलिंगम ने बताया कि फसलों में आग लगने के दो कारण हो सकते हैं। यदि खेत के ऊपर से बिजली के तार गए हैं और उसकी वजह से फसल जली है तो उसका मुआवजा आने में समय लगता है। अन्य कारण से यदि आग लगी है तो पीड़ित किसानों को मुआवजा क्यों नहीं मिला, इसका पता लगाकर मुआवजा दिए जाने का निर्देश दिया जाएगा।
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