भरवारी में हुए पटाखा फैक्टरी विस्फोट के बाद जिला अस्पताल में सुविधायुक्त बर्न यूनिट न होने की बड़ी कमी सामने आई। झुलसे लोगों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, जिन्हें सिर्फ मरहम-पट्टी कर प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) रेफर कर दिया गया।
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया गया है। इसके बाद भी यहां पर आग की घटना में गंभीर रूप से जले लोगों के इलाज के लिए कोई इंतजाम नहीं है। मामूली तौर पर झुलसे लोगों को मरहम दिया जाता है। कोई व्यक्ति ज्यादा झुलस जाता है तो अस्पताल के चिकित्सक उसे फौरान प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर कर देते हैं।
विस्फोट झुलसे उसरा के मंगलदास व अबंहा गांव के रामभवन का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में इंजेक्शन लगाने के बाद फौरन उन्हें रेफर कर दिया गया था। प्रयागराज ले जाने के दौरान वह सारा रास्ता कराहते रहे।
यह होनी चाहिए व्यवस्था
मंझनपुर। बर्न के मरीजों के शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सुविधा होनी चाहिए। आगजनी से पीड़ित मरीज के शरीर को ढकने की व्यवस्था, मच्छरदानी, बर्न वार्ड में धूल-मिट्टी नहीं जाने का इंतजाम होना चाहिए। रोगियों के लिए आइसोलेटेड बेड, स्पेशल टॉयलेट, बाथरूम, कपड़े धुलने के लिए लांड्री आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। वार्ड पूरी तरह से वातानुकूलित होना चाहिए।
फिलहाल 10 बेड की बर्न यूनिट है, लेकिन गंभीर रुप से जले लोगों के इलाज की व्यवस्था नहीं है। 20 प्रतिशत तक जले लोगों को भर्ती कर लिया जाता है। बर्न यूनिट के लिए प्लास्टिक सर्जन होना चाहिए। फिलहाल उनकी तैनाती नहीं है। भरवारी कांड में लोग काफी ज्यादा जले थे, इसलिए रेफर करना पड़ा। अब मेडिकल कॉलेज का संचालन पूरी तरह से शुरू होने वाला है। बर्न यूनिट भी बनेगी। इसके लिए पत्राचार किया गया है।
- डॉ. एसके. शुक्ला, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज