नवनिर्वाचित सांसद पुष्पेंद्र सरोज साथ में इंद्रजीत सरोज।
कौशाम्बी संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित होने के साथ ही सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज ने अपने पिता इंद्रजीत सरोज को भाजपा उम्मीदवार विनोद सोनकर के हाथों मिली हार का हिसाब चुकता कर दिया। इंद्रजीत को वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा के विनोद सोनकर के हाथों पराजय का मुंह देखना पड़ा था।
सदर विधायक इंद्रजीत सरोज तकरीबन ढाई दशक से कौशाम्बी की सियासत में सक्रिय हैं। मंझनपुर विधानसभा से बसपा के टिकट पर लगातार चार बार विधायक चुने जाने के बाद वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी लालबहादुर के हाथों पराजय का मुंह देखना पड़ा था। 2018 में बसपा सुप्रीमो से तल्खी के बाद इंद्रजीत हाथी से उतरकर साइकिल पर सवार हो गए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें कौशाम्बी संसदीय सीट से गठबंधन प्रत्याशी घोषित कर दिया।
इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर उन्हें 38,742 मतों से शिकस्त देने में सफल हुए थे। 18वीं लोकसभा चुनाव में सपा ने इंद्रजीत की जगह उनके 25 वर्षीय युवा बेटे पुष्पेंद्र सरोज को उम्मीदवार बनाया। वहींं, भाजपा ने मौजूदा सांसद विनोद सोनकर पर लगातार तीसरी बार भरोसा जताया।
नामांकन के बाद विनोद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए दावा किया था कि पिछली बार पिता को हराया था इस बार बेटे को हराएंगे। लेकिन, मंगलवार को आए चुनावी नतीजों ने भाजपा प्रत्याशी के दावों की हवा निकाल दी। विनोद सोनकर खुद चुनाव हार गए। इसी के साथ ही सपा गठबंधन प्रत्याशी पुष्पेंद्र ने पिछले चुनाव में पिता इंद्रजीत को मिली शिकस्त का हिसाब चुकता कर डाला।