मेरी ही पार्टी से मुझे निकाल दिया गया - चिराग
चिराग पासवान ने कहा कि कई बार विपरीत धाराओं में जाकर संघर्ष करना पड़ता है। पिछले दो साल से मैं संघर्ष कर रहा हूं। अपनी ही पार्टी से मुझे निकाल दिया गया है। अपने घर से ही मेरा सामान सड़क पर फेंक दिया गया, लेकिन मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं। मेरी नसों में राम विलास पासवान का खून है। न मैं डरा न मैं रूका। समझौता करना मेरी फितरत में नहीं है। आज दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में आना पड़ा है। जो लोग गए हैं उनको तो हममें से कोई वापस नहीं ला सकता। उनकी आत्मा को शांति मिले हम यही कामना कर सकते हैं।
सही मायने में हम श्रद्धांजलि तभी दे पाएंगे जब हम उनके परिवार को न्याय दिला पाएंगे। हम प्रयास में सबसे आगे रहेंगे। सीएम से बातचीत करनी हो। स्थानीय प्रशासन से बात करनी हो उन पर दबाव डालनी हो सब किया जाएगा। इस समाज के साथ आए दिन अन्याय हो रहा है। प्रशासन के साथ लिखित और मौखिक रूप से किया जाएगा। पासी समाज हक अधिकारों की लड़ाई जानता है। राम विलास पासवान अपने हक के लिए हमेशा लड़ते रहे। दुख बांटने से कम होता है। यहां से जाने के बाद भी इस पर नजर बनाए रखूंगा। हमारे प्रयासों और कार्यों में कोई कमी नहीं पाएंगे।
बच्चे का क्या कुसूर था, जो दुनिया में नहीं आया था
कौशांबी के मोहिद्दीनपुर गांव में सांत्वना देने पहुंचे लोक जनशक्ति पार्टी राम विलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। गर्भवती महिला की हत्या की जितनी निंदा की जाए कम है। उस बच्चे का क्या दोष था जो इस दुनिया में आया था, जो इस दुनिया में आया भी नहीं था। इस घटना को अंजाम देने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आठ लोगों के नाम एफआईआर में हैं। दो लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा सका है। यहां से जाने के बाद वह तमाम वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करें और पीड़ितों को न्याय दिलाने का कार्य करेंगे।
योगी सरकार का किया बचाव
यूपी सरकार के किसी मंत्री के न पहुंचने के सवाल पर कहा कि यदि आप राजनीति करेंगे तो मेरे आने मकसद को नहीं जान पाएंगे और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाएंगे। हम राजनीति नहीं न्याय चाहते हैं। लंबे समय से विवाद चल रहा था लेकिन प्रशासन की ओर से लापरवाही की गई।
इंडिया गठबंधन द्वारा पत्रकारों का बहिष्कार गलत
मीडिया के लोगों को सवाल पूछने से रोकना यह लोकतंत्र के खिलाफ है। मीडिया तो सवाल पूछेगा ही, उनका बहिष्कार करना गलत है। कई ज्वलंत सवाल पूछे जाते हैं। लेकिन बाइकाट करना गलत है। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। इलले आपातकाल की याद ताजा हो गई है।