मोहिद्दीनपुर गांव में तैनात पुलिस फोर्स।
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कमाई ठीक उसनें वहीं लालचंद्र निर्मल की पट्टे में मिली जमींन का एग्रीमेंट करा लिया। विवाद टालने के खातिर वह पत्नी को लेकर उसी विवादित भूमि में रहने लगा। उधर, शिवसरन के ससुर होरीलाल के बेटे भी बाहर रहकर कमाते थे। इस वजह से होरीलाल भी बेटी-दामाद के साथ रहने लगा। शुक्रवार तड़के भूमि विवाद में तीनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
शनिवार सुबह शिवसरन के भाई दिल्ली से पहुंचे व शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव लाए। जबकि होरीलाल के बेटे उसका व बहन बृजकली का शव अपने साथ ले गए। घरवालों को मलाल यह रहा कि बृजकली का अंतिम संस्कार भी वह शिवसरन के साथ करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने रोक दिया।
रोते बिलखते परिजनों को सांत्वना देते पुलिस अधिकारी।
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रात से ही कांकराबाद में बैठा दिया गया था पहरा
पुलिस पहले तीनों शवों का उमरछा में ही अंतिम संस्कार करना चाहती थी। इसके लिए घाट किनारे तीन कब्र बनवाई गईं। ऐन वक्त में पुलिस ने प्लान बदला व शिवसरन के पिता को समझाकर उसे गांव के समीप ही संदीपनघाट में अंतिम संस्कार के लिए राजी किया। कोखराज, सैनी, पिपरी, कड़ाधाम कोतवाली पुलिस के अलावा सीओ सिराथू अवधेश विश्वकर्मा रात से ही कांकराबाद गांव में डट गए थे। खुफिया विभाग की टीम भी निगरानी कर रही थी। पुलिस ने ही शव दफन करने के लिए गड्ढा खुदवा लिया। पोस्टमार्टम हाउस से सीधे शव गांव लाया गया व वहां आनन-फानन अंतिम संस्कार कराकर परिजनों को घर भेज दिया। सुबह 9.30 बजे एसडीएम सिराथू सौम्य मिश्र भी पहुंचे व परिजनों को सांत्वना दी।
तीन हत्याओं के बाद घरों में लगाई गई आग।
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गिड़गिड़ाती रही सास, साहब बहू का भी शव मंगवा दो
मृतक शिवसरन की मां लालती देवी अपने बेटे के शव के पास रोती बिलखती रही। वह बहू का शव गांव मंगलाने की जिद करती रही लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। लालती ने कहा साहब बेटवा तो चला गवा अब पतोहु का भी शव मगवाय देव ओहूका भी देख लेई, साहब अब मगवाय देव जब तक न मगवाईहव हम अपने बेटवा का न लै जाय देब। सीओ सिराथू अवधेश विश्वकर्मा ने किसी तरह समझा-बुझाकर उसे शांत कराया।