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गंगा किनारे खेती के लिए कॉरिडोर बनने से हजारों किसानों को फायदा

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Thousands of farmers benefited from the construction of a corridor for agriculture along the Ganges. - फोटो : KAUSHAMBI
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आम बजट में गंगा किनारे के गांवों में खेती के लिए कॉरिडोर बनाने की घोषणा से जिले के 172 गांवों के किसानों को फायदा मिलेगा। इसके साथ ही यहां जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
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आम बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गंगा किनारे गांवों में खेती करने वाले किसानों के लिए कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इन गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। जिले में 172 गांव गंगा के किनारे स्थित हैं।
सिराथू से लेकर चायल तहसील तक गंगा किनारे हजारों हेक्टेयर कछारी भूमि पर किसान खेती करते हैं। इस इलाके में किसान मूंगफली, सब्जी, खीरा, ककड़ी, खरबूजा की फसलों का उत्पादन करते हैं।
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लेकिन पिछले कुछ सालों से गंगा में असमय आने वाली बाढ़ से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वित्त मंत्री ने बजट में गंगा किनारे कॉरिडोर स्थापित करके प्राकृतिक खेती कराने पर जोर दिया। इस घोषणा से कछारी क्षेत्र में बसे 172 गांवों के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
महंगाई से राहत नहीं मिलने से गृहिणियां नाराज
महंगाई से राहत नहीं मिलने पर गृहिणियों में आम बजट को लेकर नाराजगी है। आयकर स्लैब में भी कमी नहीं होने से करदाता निराश हैं। मंगलवार को केंद्रीय बजट का जिले के लोगों को भी इंतजार रहा। टेलीविजन पर लोग बजट में मिलने वाली सौगातों पर टककटी लगाए रहे।
केंद्रीय वित्त मंत्री महिला है। उम्मीद थी कि बजट में वह रसोई गैस से लेकर घरेलू उत्पाद सस्ते होंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बजट का सिर्फ बड़ी परियोजनाओं के इर्द-गिर्द ही घूमता दिखा। आज हालात यह है कि रसोई गैस का सिलिंडर भराने में सोचना पड़ता है। महंगाई से घर का बजट प्रभावित हो रहा है।
सुचिता केसरवानी, गृहणी, मंझनपुर
बजट में किसान, नौजवान, छात्र और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाया गया है। घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले सामान सस्ते नहीं किए गए। यह बात अच्छी है कि वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में बेहतर पहल की है, लेकिन उन्हें मध्यम वर्गीय परिवारों का भी ध्यान रखना चाहिए था।
अलका गौतम, गृहिणी, भदवां
केंद्रीय बजट में एक बार फिर सरकार ने कांट्रैक्ट फार्मिंग की तरफ कदम बढ़ाने की अपनी मंशा साफ कर दी है। किसान को अगर उर्वरक, बीज और ऋण आदि में सब्सिडी दी जाती तो किसानों को काफी फायदा होता। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, लेकिन आय दोगुनी कैसे होगी? यह नहीं बताया गया।
नूरूल इस्लाम, जिलाध्यक्ष, भाकियू
एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दंभ भरती है, वहीं दूसरी तरफ बजट में छोटे किसानों को राहत नहीं दी गई। सरकार अगर किसानों की सच्ची हितैषी होती तो बजट में उर्वरक के दाम घटा दिए जाते। किसान सम्मान निधि का पैसा भी नहीं बढ़ाया गया।
अजय सोनी, प्रमुख, समर्थ किसान पार्टी-
अधिवक्ताओं को भी रास नहीं आया बजट
केंद्र सरकार के बजट में मोदी सरकार की जुमलेबाजी फिर उजागर हुई है। वित्त मंत्री ने 60 लाख नई नौकरियां देने की बात कही है। उससे पहले भी मौजूदा सरकार ने दो करोड़ नौकरी देने की बात की थी। आर्थिक सर्वे के अनुसार महंगाई 2.3% से बढ़कर 14.9 % हो गई है। क्रिप्टोकरेंसी से आय पर 30 %टैक्स लगाया गया है जबकि इनको अनियंत्रित क्रिप्टो मार्केट को विनियमित करने पर ध्यान देना चाहिए। देश की जनता टैक्स वसूली के बोझ से परेशान है। सरकार को जनता का दर्द दिखना चाहिए न कि अपना खजाना भरना।
शशि प्रताप त्रिपाठी, एडवोकेट, मंझनपुर
आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। महंगाई से पीड़ित मध्यम वर्गीय लोगों के लिए छूट सीमा बढ़ाने की आवश्यकता थी। छूट योग्य बचत योजनाओं में इन्वेस्ट की सीमा नहीं बढ़ाई गई। ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बजट में की गई वृद्धि, इसी प्रकार पांच नदियों को जोड़ने की योजना सराहनीय है। आयकर रिटर्न में भूल सुधार करने की समय सीमा पूर्व की भांति दो वर्ष किया जाना स्वागत योग्य है।
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आरपी मिश्रा एडवोकेट, अध्यक्ष- जिला कर अधिवक्ता संघ कौशाम्बी
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