सरायअकिल के रक्सराई गांव में कथा कहते ब्यास गौरव कृष्ण शास्त्री। स्रोत: आयोजक
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रक्सराई गांव में आयोजित संगीतमय भागवत कथा के अंतिम दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा ब्यास पं. गौरवकृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र,यदुवंश उद्धार और परीक्षित मोक्ष की कथा विस्तार पूर्वक वर्णन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ।
कथा ब्यास ने प्रसंग में बताया कि राजा परीक्षित एक दिन शिकार के लिए जंगल में बहुत दूर निकल गए थे। उनको प्यास लगी तो जल की तलाश करते-करते वह समीक मुनि के आश्रम में पहुंचे। जहां समीक मुनि साधना में लीन थे। परीक्षित के आवाज देने पर जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो राजा परीक्षित ने कलयुग के प्रकोप के कारण समीक मुनि के गले में मृत सर्प डाल कर चले गए।
जिसपर समीक मुनि के पुत्र शृंगी ऋषि जलाशय में स्नान कर रहे थे। जानकारी होने पर उन्होंने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग काटने से मृत्यु का श्राप दे दिया। इस दौरान मुख्य यजमान जगत नारायण द्विवेदी, सावित्री देवी, मयंक कुमार, प्रमोद कुमार, दिलीप कुमार आदि रहे।