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आज से बजेगी शहनाई, होंगी शादियां

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आज से बजेगी शहनाई, होंगे शादी-विवाह
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न मेहमानों की संख्या पर बंदिश और न ही अनुमति लेने की पड़ेगी जरूरत
मंझनपुर। बैंड, बाजे और शहनाइयों की गूूंज रविवार से होने लगेगी। देवोत्थान एकादशी पर 14 नवंबर से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। इस बार शादियों में न तो मेहमानों की संख्या पर बंदिश है और न ही अनुमति लेने की जरूरत पड़ेगी। लंबे समय बाद सहालग सीजन को लेकर हर व्यक्ति उत्साहित है।
दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते पिछले डेढ़ साल से शादी समारोह पर तमाम बंदिशें थीं। सरकार ने आयोजनों में मेहमानों की संख्या निर्धारित कर दी थी। साथ ही बरात और अन्य आयोजनों की अनुमति लेनी पड़ रही थी। इसके चलते वैवाहिक समारोह से जुड़े लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। रविवार से देवोत्थान एकादशी के साथ शादियां फिर शुरू हो जाएंगी। त्योहार और शादी के आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं।
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विवाह लग्न की तिथियां-
नवंबर - 14, 15, 19, 20, 21, 28, 29, 30
दिसंबर - 1, 2, 3, 5, 7, 11, 12 और 13
मंझनपुर। त्योहारों के बाद अब शादी-विवाह शुरू होने से जिले की बाजारें गुलजार हैं। व्यापारियों के अनुसार लगभग एक माह में होने वाली शादियों व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों से अच्छा व्यापार होने का अनुमान है। सर्राफा बाजार में भी चमक तेज हो गई है। दूल्हा - दुल्हन के लिए पहने जाने वाले आभूषण तेजी से तैयार हो रहे हैं। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार पिछले वर्षों की अपेक्षा इस सीजन व्यापरियों व कारीगरों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर साबित होने की संभावना है। प्रमुख कस्बों में 14 नवंबर से 13 दिसंबर तक के लिए लगभग सभी विवाह घर बुक हो चुके हैं। कोरोना के कारण पिछले दो वर्ष में कैटरिंग का काम लगभग दम तोड़ चुका था, लेकिन अब स्थिति कुछ अलग हो गई है। कैटरिंग संचालक अरुण जायसवाल का कहना है कि लोगों में उत्साह है। कैटरिंग संचालकों के पास पर्याप्त काम है।
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डीजे-बैंड कारोबार भी कोविड के चलते ठंडा पड़ा था। नसीम, अभिलष डीजे वाले के अनुसार 14 व 15 नवंबर से एक बार फिर तेजी आ जाएगी। करीब - करीब सभी डीजे व बैंड नवंबर तथा दिसंबर के लिए बुक हो चुके हैं। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में निद्रा करते हैं। उनका जागरण देवोत्थान एकादशी पर होता है। आचार्य दिनेश त्रिपाठी शांडिल्य के अनुसार देवोत्थान एकादशी की तिथि 14 नवंबर को सुबह 5:48 बजे से 15 नवंबर को सुबह 6:39 बजे तक रहेगी। रविवार को पूरा दिन और सोमवार को उदयातिथि होने के कारण यह पर्व दो दिन मनाया जाएगा। पर्व पर श्रद्धालु तुलसी-शालिग्राम का विवाह भी करेंगे। 14 दिसंबर की मध्य रात्रि 3:48 बजे सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इससे विवाह कार्य थम जाएंगे, जो फिर मकर संक्राति के बाद प्रारंभ होंगे।
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