तहसील क्षेत्र के रनिहापर गांव में बुधवार को तालाब की पैमाइश के दौरान जमकर हंगामा हुआ। नाराज ग्रामीणों ने पैमाइश करने पहुंची राजस्व टीम और ग्राम प्रधान का विरोध किया तो उन्हें घर गिराने की धमकी दी गई। धमकी से सहमे एक ग्रामीण की हालत भी बिगड़ गई। इलाज के लिए उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रकरण की शिकायत ग्रामीणों ने अधिकारियों से की है। इसके बाद ग्रामीण तहसील पहुंचे और प्रदर्शन किया।
दरियापुर गांव के मजरा रनिहापर में ग्रामीणों के आने जाने के लिए बिछाया गया खड़ंजा तालाब से हो रहे कटान के कारण खराब हो गया है।
इससे लोगों को आवागमन में लिए परेशानी हो रही है। इसे लेकर मंगलवार को दर्जनों ग्रामीणों ने तहसील पर प्रदर्शन कर तालाबी नबंर पर हो रहे मत्स्य पालन का पट्टा निरस्त कराने और रास्ता बनवाने की मांग की थी। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और हल्का लेखपाल पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।
ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को हल्का लेखपाल महेश मिश्रा गांव पहुंचे और ग्राम प्रधान शुभम सिंह को साथ लेकर तालाब की पैमाइश कराने लगे। आरोप है कि ग्रामीणों के विरोध करने पर ग्राम प्रधान और उसके साथियों ने उनके मकान गिराने की धमकी दी।
धमकी से सहमे सोहन लाल को दिल का दौरा पड़ा और उसकी हालत बिगड़ गई। इससे नाराज ग्रामीण ग्राम प्रधान और लेखपाल पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे। इस दौरान किसी ने हंगामे का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
इसकी भनक लगते आरोपी ग्राम प्रधान व लेखपाल मौके से खिसक गए। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान चुनावी रंजिश को लेकर उनके मजरे में मनमानी कर रहा है। लेखपाल को साथ में लेकर उनके मकान और रास्ते की जबरन पैमाइश कराकर अवैध वसूली कर रहा है
। पैसा नहीं देने पर उनके घरों को जबरन गिराने की धमकी दी जा रही है। इसी को लेकर ग्रामीणों ने तहसील पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत एसडीएम से की है। वहीं, एसडीएम राजेश श्रीवास्तव ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया है। उनका कहना है कि संबंधित कानूनगो से पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
किसके आदेश पर पैमाइश करने पहुंची थी टीम
चायल। रनिहापर गांव में बुधवार को तालाबी और सरकारी जमीन की पैमाइश करने पहुंची टीम को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान के इशारे पर चुनावी रंजिश को लेकर गांव में लेखपाल पैमाइश करने पहुंचे थी। पैमाइश के लिए किसी भी अधिकारी का न तो कोई आदेश था और न ही इसके लिए ग्रामीणों को पहले से कोई सूचना दी गई थी।