कोतवाली के भइला गांव के पास सोमवार दोपहर दोस्त के साथ रिश्तेदारी से घर लौट रहे एक हिस्ट्रीशीटर को लोहे की रॉड से पीट कर मरणासन्न कर दिया गया। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
परिजनों ने अभी किसी के खिलाफ कोई तहरीर नहीं दी है। पुलिस अपने स्तर से कई बिंदुओं पर छानबीन कर रही है।
सरायअकिल इलाके के कोटिया निवासी संदीप पाल हिस्ट्रीशीटर बदमाश है। उसके खिलाफ जिले के विभिन्न थानों ने लूट,चोरी और छिनैती जैसी घटनाओं के करीब दर्जन भर से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
सोमवार सुबह संदीप बाइक से दोस्त सौरभ निवासी सोनौली, थाना पश्चिमशरीरा के साथ अपनी ससुराल मंझनपुर गया था।
दोपहर करीब तीन बजे वह दोस्त सौरभ के साथ घर लौट रहा था। जैसे ही दोनों लोग करारी कोतवाली के भइला मकदूमपुर गांव के पास पहुंचे, तभी पीछे से आए दो बाइक सवार चार युवकों ने उन्हें ओवरटेक कर रोक लिया।
जब तक संदीप कुछ समझ पता हमलावरों ने उसके सिर पर लोहे की राॅड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
साथी को पिटता देख शोर मचाते हुए उसका दोस्त सौरभ गांव की ओर भागा। हमले में संदीप का सिर फटने के साथ ही एक हाथ और एक पैर में फ्रैक्चर हो गया। चीख-पुकार सुन स्थानीय ग्रामीण लाठी-डंडा लेकर घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े।
ग्रामीणों से घिरता देख हमलावर एक बाइक छोड़कर दूसरी बाइक से फरार हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल संदीप को इलाज के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। इंस्पेक्टर विनीत सिंह ने बताया कि परिजनों को सूचना दे दी गई है।
फिलहाल अभी कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर केस दर्ज कर लिया जाएगा। पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है।
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गांव में चल रही पुरानी अदावत
कोटिया गांव में ग्राम प्रधान के दोबारा चुनाव होने के बाद से संदीप पाल और उसके विरोधियों के बीच अदावत चल रही है। सूत्रों के मुताबिक संदीप पाल इस बार ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ना चाहता है, इस कारण गांव में उसकी सियासी टशन चल रही है। पुलिस इस बिंदु पर भी छानबीन कर रही है।
जिपं.सदस्य को गोली मारने के आरोप में जा चुका है जेल
भइला गांव में हमलावरों का शिकार हुआ हिस्ट्रीशीटर संदीप एक साल पहले वार्ड नंबर 23 के जिला पंचायत सदस्य राज गौतम पर गोली चलाने के आरोप में भी जेल भी जा चुका है। वहीं, पखवाड़े भर पहले कोटिया गांव में हुए गोलीकांड में संदीप और उसके भाई कुलदीप को नामजद करते हुए पुलिस को तहरीर दी गई थी। इस प्रकरण में पुलिस ने जब घटना की छानबीन की तो संदीप और उसका भाई कुलदीप निर्दोष साबित हुए थे। सरायअकिल पुलिस ने दोनों भाइयों को क्लीनचिट देते हुए छोड़ दिया था।