दहेज हत्या के सात साल पुराने एक मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला जज त्वरित न्यायालय प्रथम कीर्ति कुणाल की अदालत ने आरोपी पति, सास-ससुर और देवर समेत चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों पर 64 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की आधी रकम मृतका के वारिस को देने का आदेश दिया है।
अभियोजन के मुताबिक मंझनपुर कोतवाली के ऊनौ गांव निवासी संगम लाल पांडेय ने अपनी बेटी सविता की शादी वर्ष 2002 में पश्चिमशरीरा कस्बा में रहने वाले रामसखा के बेटे गंगा प्रसाद पांडेय के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुराली अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे थे। मायके पक्ष के असमर्थता जाहिर करने पर ससुरालियों ने 23 अगस्त 2014 को सविता की गला घोटकर हत्या कर दी थी।
मामले में मृतका के पिता संगम लाल ने पश्चिमशरीरा कोतवाली में उसके पति गंगा प्रसाद, ससुर रामसखा, सास उर्मिला देवी और देवर गुंडा उर्फ नीलू समेत चार के खिलाफ दहेज हत्या की एफआईआर दर्ज कराई। कोतवाली पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला जज त्वरित न्यायालय प्रथम कीर्ति कुणाल की अदालत में चली। अभियोजन की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अनुरुद्घ कुमार ने कुल आठ गवाहों को प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की सुनने व पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने पर अदालत ने सभी को दोषी करार दिया।