वाराणसी के रामनगर की तर्ज पर ऐतिहासिक कस्बा दारानगर में आयोजित होने वाली रामलीला बुधवार से प्रारंभ होगी। 13 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ होगा। खास बात ये है कि यहां रावण वध की लीला दशहरा नहीं बल्कि एकादशी के दिन की जाती है।
श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आद्या प्रसाद पांडेय ने बताया कि बुधवार को मुकुट पूजा के साथ 242वीं रामलीला का शुभारंभ होगा। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को ताड़का वध तो शुक्रवार को विश्वामित्र के साथ भ्रमण का मंचन होगा। नौ अक्तूबर शनिवार को फुलवारी लीला तो रविवार को धनुष यज्ञ की लीला का मंचन होगा।
वहीं, सोमवार को वन गमन व मंगलवार को सूर्पणखा की लीला होगी। बुधवार को सीता हरण बृहस्पतिवार को लंका दहन तथा शुक्रवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। शनिवार को बड़ा दशहरा रविवार को भरत मिलाप तथा सोमवार को राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन होगा। यहां की रामलीला की दो बड़ी खासियतें हैं।
पहला तो यह कि यहां रामलीला मंच पर होने के बजाय तीन किलोमीटर के दायरे में हर दिन अलग-अलग स्थानों पर जाती है। दूसरा यह कि यहां रावण विजय दशमी के अगले दिन एकादशी को मारा जाता है।
15 और 16 अक्तूबर को होगा कुप्पी युद्घ
दारानगर की ऐतिहासिक रामलीला अब से 242 वर्ष पहले पं. विजय राम मिश्र ने शुरू कराई थी। इस रामलीला की कई विशेषताएं हैं। पहला तो यह कि यहां की रामलीला का मंचन दिन में होता है रात को सिर्फ सांस्कृतिक होते हैं। दूसरी बड़ी खासियत यह है कि यहां राम-रावण की सेनाओं के बीच सजीव कुप्पी युद्ध होता है। श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आद्या प्रसाद पांडेय ने बताया कि इस बार 15 और 16 अक्तूबर को कुप्पी युद्ध होगा।