11 हजार रुपये शिवशंकर ने दुर्गेश को तिलक में उपहार स्वरूप दिए। बृहस्पतिवार को दुर्गेश को पूजा के घर बारात लेकर आना था। तिलक के बाद अचानक पूजा के पिता लापता हो गए। परिवार के लोगों ने उनकी काफी खोजबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। घर में शादी की खुशियों की जगह गमगीन महौल हो गया। ठीक बारात के दिन यानि बृहस्पतिवार को पूजा की मां ने होने वाले दामाद दुर्गेश से अपनी बेबसी बयां की।
इस पर दुर्गेश ने अपनी सास को समझाया और उन्हें पूजा के साथ अपने घर बुला लिया। पूजा अपनी मां व कुछ रिश्तेदारों के साथ दुर्गेश के साथ पहुंची। यहां सादे समारोह में दुर्गेश ने पूजा के गले में वरमाला डालकर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इस शादी को लेकर इलाके में काफी चर्चा है। लोग दुर्गेश व उसके परिवार वालों के कायल हैं।
धरी रह गई बारात की तैयारी
दुर्गेश ने अपनी शादी धूमधाम से करने का फैसला लिया था। डीजे, आतिशबाजी व कई वाहन बारात जाने के लिए बुक किए गए थे। घर में रिश्तेदारों की फौज जमा थी। तभी दुर्गेश की सास यानि पूजा की मां ने फोन करके अपनी बेबसी बयां की। पूजा की मां ने कहा कि ... भैया तिलक के बाद से ही पति कहीं चले गए हैं। शादी की सारी जिम्मेदारी मुझ पर है। हमारे पास कुछ भी नहीं है। इतना सुनते ही दुर्गेश ने अपनी सास को दिलासा दिया और उन्हें अपनी होने वाली पत्नी पूजा के साथ अपने घर बुला लिया। दूल्हे दुर्गेश के घर पर ही शादी की रस्म पूरी हुई।