रुद्राभिषेक में काशी विश्वनाथ को अर्पित दूध नालियों में नहीं बहाया जाएगा। अब बाबा को चढ़ा दूध प्रसूताओं और मानसिक अस्पताल के रोगियों में वितरित करने की तैयारी है।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की आगामी बैठक में दूध वितरण से संबंधित यह योजना पेश की जाएगी।
बाबा विश्वनाथ को चढ़ने वाला दूध नालियों में बहाने का मामला ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद मंगलवार को न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने मुख्य कार्यपालक को इस पर जल्द योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
कार्यपालक समिति के अध्यक्ष मंडलायुक्त चंचल कुमार तिवारी से भी वह इस पर मशविरा करेंगे। न्यास अध्यक्ष ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर से दूध महिला चिकित्सालयों में भर्ती प्रसूताओं, मानसिक अस्पताल के रोगियों, कैदियों में वितरित करने का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।
उन्होंने इसे न्यास परिषद की अगली बैठक में ही पारित कराने की मंशा जाहिर की। उन्होंने बताया कि दूध को भंडारित करने में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाएगा। बाबा को दूध स्पर्श कराने के बाद उसे अलग बर्तन में एकत्र करवा लिया जाएगा, ताकि शुद्ध दूध वितरित कराया जा सके।
वर्ष 2002 में बाबा के अरघे में अर्पित किए जाने वाले गंगा जल को पाइप लाइन से गंगा में गिराने की योजना बनी थी। तब दूध अलग एकत्र कर वितरित किया जाता था। लेकिन बाद में दूध भी नाली में बहाया जाने लगा। मौजूदा समय यह पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है और चढ़ावे का दूध घाट की सीढ़ियों पर बहकर दिक्कतें पैदा कर रहा है।