फोटो31कासगंज श्रम विभाग की टीम दुकान पर बाल श्रमिक पाए जाने के बाद कार्रवाई करती। स्रोत: विभा
कासगंज। मासूम हाथों से काम के औजार छीनकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए श्रम विभाग ने कमर कस ली है। जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गुरुवार को सोरों, सहावर और अमांपुर कस्बों में छापेमारी कर टीम ने विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से पांच बाल व किशोर श्रमिकों को मुक्त कराया। इस कार्रवाई के दौरान श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों को कानून का पाठ पढ़ाते हुए सख्त हिदायत दी।
जिले में बाल श्रम के समूल खात्मे, बच्चों को आर्थिक सहायता व उनके शैक्षिक पुनर्वासन के लिए 31 अगस्त तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सहायक श्रम आयुक्त सुरेंद्र सिंह के निर्देशन में श्रम प्रवर्तन अधिकारी शाहिद अली खान और रामवीर सिंह ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट व स्थानीय पुलिस बल के साथ बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों और प्रमुख बाजारों में सघन जांच पड़ताल की।
टीम ने होटलों, ढाबों, गैराजों और अन्य दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पांच बच्चे काम करते पाए गए, जिन्हें टीम ने तत्काल मुक्त करा लिया। अधिकारियों ने व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों को दो टूक लहजे में समझाया कि बच्चों का शोषण करना कानूनन जुर्म है। उन्होंने समाज से बाल श्रम जैसी कुप्रथा को मिटाने में सहयोग की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि मुक्त कराए गए सभी बच्चों का नियमानुसार आर्थिक और शैक्षिक पुनर्वासन सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि वे दोबारा मजदूरी के दलदल में न धंसें। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर न रखें और ऐसी कोई भी जानकारी मिलने पर तत्काल विभाग को सूचित करें।
जुर्माना और जेल का है प्रावधान
सहायक श्रम आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि बच्चों से मजदूरी कराने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी
खतरनाक श्रेणी के काम में बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले मालिकों को 2 वर्ष तक की जेल या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
गैर-खतरनाक श्रेणी के काम लेने के दोषी पाए जाने पर 1 माह की सजा या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।