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यूक्रेन पर हमला: यूक्रेन में कासगंज के फंसे सात छात्र-छात्राएं, इस सूचना के बाद माता-पिता की बढ़ीं धड़कनें, घर लौटने का हो रहा इंतजार 

Wed, 02 Mar 2022 12:57 PM IST
शाहरुख खान संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं के परिजन अपने जिगर के टुकड़ों की जल्द घर वापसी की कामना कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी छात्र-छात्रा को फ्लाइट नहीं मिलने के चलते उनका इंतजार लंबा होता जा रहा है। परिजनों के मुताबिक बच्चों के पास रुपये खत्म हो चुके हैं। खाने-पीने की चीजों को लेकर भी जूझना पड़ रहा है। ऐसे में सभी अपने बच्चों की सुरक्षित घर वापसी को लेकर ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूक्रेन में कासगंज के 7 छात्र-छात्राएं फंसे हुए हैं। इनमें कुछ बॉर्डर क्रॉस कर गए हैं तो कुछ छात्राएं अभी भी यूक्रेन के बॉर्डर में ही हैं। सोमवार को रूस ने यूक्रेन पर हमला और तेज कर दिया। रूस के हमले में एक भारतीय छात्र की मौत की खबर मिलते ही परिजन में चिंता और बढ़ गई। सभी परिजन बच्चों की जल्द घर वापसी की कामना कर रहे हैं, लेकिन अभी किसी भी छात्र-छात्रा को फ्लाइट नहीं मिल सकी है। सभी को अपनी बारी का इंतजार है। आइए जानते हैं, किस तरह इस संकट की घड़ी में जूझ रहे हैं जिले के छात्र-छात्राओं व उनके परिवार।  

चेतावनी के बाद कीव से ल्वीव पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे शोभित

शहर के मिशन चौराहा निवासी राजकुमार माहेश्वरी के पुत्र शोभित माहेश्वरी 24 फरवरी से कीव में फंसा हुआ था। वह एक मेडिकल कॉलेज की बेसमेंट में बनी जिम में साथियों के साथ छिपे थे, लेकिन रविवार को कीव को खाली करने की चेतावनी मिलने के बाद सभी भारतीय छात्र-छात्राएं ट्रेनों के माध्यम से बॉर्डर तक पहुंच गए हैं। शोभित भी रविवार की देर रात पोलैंड के ल्वीव बॉर्डर पर पहुंच गया, लेकिन ल्वीव बॉर्डर पर छात्र-छात्राओं की काफी भीड़ है। अभी उसे प्रवेश नहीं मिला है। पिता राजकुमार ने बताया कि बॉर्डर पर काफी भीड़ है और अफरा-तफरी का आलम है। बच्चे बहुत भयभीत हैं। उसकी घर वापसी की कामना कर रहे हैं।

गर्विता विनीसिया से हंगरी बॉर्डर के लिए निकलीं

विनीसिया में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा गर्विता माहेश्वरी पुत्र प्रियदर्शन माहेश्वरी निवासी विश्व बैंक कॉलोनी सोमवार को एक निजी बस से विनीसिया शहर से अपने साथी छात्र छात्राओं के साथ हंगरी बॉर्डर के लिए निकल चुकी है। जानकारी के मुताबिक अभी उन्हें हंगरी बॉर्डर पहुंचने में समय लगेगा। पिता प्रियदर्शन माहेश्वरी ने बताया कि यूक्रेन में काफी अफरा-तफरी का माहौल है। जगह जगह ट्रैफिक जाम मिल रहा है। ऐसे स्थिति में कब तक वह बॉर्डर तक पहुंच सकेगी कुछ कहा नहीं जा सकता।

कब मिलेगी दामिनी को फ्लाइट?

आवास विकास कॉलोनी निवासी छोटे लाल शाक्य की पुत्री दामिनी शाक्य डिनिप्रो से अपने साथियों के साथ एक बस से रोमानिया बॉर्डर पहुंच गई है। दामिनी के बॉर्डर पर पहुंचने से परिजन ने राहत की सांस ली है, लेकिन सोमवार को युद्ध तेज होने के बाद से चिंताएं कम नहीं हो रहीं। छोटे लाल ने बताया कि इस बात का इंतजार है कि दामिनी को फ्लाइट कब मिलेगी। उन्होंने कहा कि भगवान से दिनरात यही कामना कर रहे हैं कि बच्चे जल्द घर पहुंचे। यूक्रेन में लगातार हालात बिगड़ रहे हैं।
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27 घंटे के इंतजार के बाद हंगरी बॉर्डर क्रॉस कर पाए गिर्राज

गंगागढ़ निवासी छोटे लाल का पुत्र गिर्राज खारकीव से हंगरी बॉर्डर के लिए निजी बस से रवाना हुआ थे। सोमवार को ट्रैफिक जाम में फंसे रहे, लेकिन 27 घंटे लंबे इंतजार के बाद हंगरी बॉर्डर पर गिर्राज इंट्री कर पाए। जानकारी के मुताबिक गिर्राज को बीते पांच दिनों में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। खाने पीने की काफी किल्लत थी। हंगरी बॉर्डर पर प्रवेश मिलने के बाद अब राहत मिली है। पिता छोटे लाल ने बताया कि बेटा जल्द घर लौट आए तब राहत मिले। अब उसे कब हवाई जहाज मिलेगा यह निश्चित नहीं है। एक दो दिन में वह घर वापस आ सकता है।

स्लोवाकिया से भारत लौटेंगीं आवास विकास की शिवानी

आवास विकास कॉलोनी निवासी वीरेंद्र सिंह की पुत्री शिवानी टर्नेपिल से स्लोवाकिया में पहुंच गई है। शिवानी टर्नेपिल शहर से एमबीबीएस की शिक्षा ले रहे हैं। शिवानी रविवार को अपने होस्टल से छात्र-छात्राओं के ग्रुप के साथ बस से निकली थी। अब स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंच गई है। इस बॉर्डर पर पहुंचने वाले भारतीय छात्र-छात्राओं की संख्या काफी कम है। शिवानी स्लोवाकिया से भारत आएगीं। पिता वीरेंद्र कुमार ने बताया कि बेटी सुरक्षित है। खान पान सहित जो अन्य दिक्कतें बच्चों के साथ बनी हुई हैं उनका समाधान हो। बेटी के घर आने का इंतजार है।

रोमानिया में फ्लाइट का इंतजार कर रहा विशाल

शहर के समीपवर्ती गांव नगला वाले के शिक्षक मनोज कुमार के बेटे विशाल विनीसिया शहर में एमबीबीएस की शिक्षा ले रहे हैं। वहां से वह रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला थे। रोमानिया बॉर्डर पर वह पहुंच चुके हैं। अब उसे फ्लाइट मिलने का इंतजार है। अभी तक फ्लाइट नहीं मिली है। विशाल ने अपना पंजीकरण करा दिया है। फ्लाइट मिलते ही वह स्वदेश लौट सकेंगे। उनकी प्रतीक्षा में घरवालों की आंखें थक चुकी हैं। 

शिवकुमार के पिता बोले बेटे से नहीं हो पा रहा संपर्क

पटियाली तहसील क्षेत्र के गांव खिजरपुर निवासी कृष्णपाल के बेटे शिवकुमार यूक्रेन के जापोरिज्ज्या शहर से शिक्षा ले रहे है। घऱवालों के मुताबिक यह शहर बॉर्डर से काफी दूर है, लेकिन शिवकुमार जोखिम उठाते हुए बॉर्डर पर पहुंचने की कोशिश कर रहा है। पिता कृष्णपाल ने बताया कि सोमवार की शाम को शिवकुमार से बात हुई थी, लेकिन उसके बाद संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने संभावना जताई की वह शायद बॉर्डर के लिए निकल चुका है। कृष्णपाल ने बताया कि बच्चों के पास पैसे नहीं है। खाने पीने की दिक्कत है।
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