कासगंज/सहावर। बड़ा गांव कोटरा में अभी भी बीमारियों का कहर थमा नहीं है। डीएम के निर्देश के बाद मरीजों को कासगंज और सहावर के चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। जहंा चिकित्सकों की टीम की देखरेख में मरीजों का इलाज चल रहा है।
बड़ा गांव कोटरा में बुखार और अन्य बीमारियां फैलने की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी चैत्रा वी ने स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीणों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीके सिंह स्वयं चिकित्सीय टीम के साथ बड़ा गांव कोटरा पहुंच गए। रोगियों को आनन फानम में चिकित्सालय में ले जाने की व्यवस्था की गई। विभाग ने कासगंज के अस्पताल में रहीला, नन्हो, महरून निशा, वंशीलाल, मायादेवी, शिवजीत, शोहिल, मुनीसा, रिहाना, समा, नत्थू खां, फिरोज, रिजवाना, नेमसिंह, भारती, पूनम, फैजल, हसरत उल्ला खां को भर्ती किया है। वहीं सहावर में रूबी, असफीन, मुजल्लस, अमरीन, रामप्रसाद, अदनान, माया, नेमवती, रिहान, फरमान, इरफान, नफीश, प्यारेनिजा को भर्ती किया है। इन सभी मरीजों का ब्लड टेस्ट भी चिकित्सकों ने किया है। टेस्टिंग में मलेरिया पाजिटिव निकला है। इसके अलावा गांव में अभी भी काफी संख्या में ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। गांव में संतोष मिश्रा, श्रीराम, राधेश्याम,रीता, बन्ने, आठ माह का अयान एवं किश्वरी बेगम बुखार से पीड़ित पाई गई हैं। जिनका चिकित्सक उपचार कर रहे हैं। गांव में चिकित्सकों की टीम के द्वारा मरीजों का परीक्षण किया जा रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि गांव में पानी में क्लोरीन की दवा डलवाई गई है। इसके अलावा दवा का छिड़काव भी किया गया है। जो भी बुखार से पीड़ित मिल रहे हैं। उनकों दवा वितरित की जा रही है। गंभीर मरीजों को इलाज दिलाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम। गांव कोटरा के चारों गंभीर मरीजों को उपचार दिलाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम साबित हुआ है। अलीगढ़ में इन मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पाया। जिससे ये चारों मरीज अपने गांव वापस लौट आए। अब इन मरीजों को खुदा का ही आसरा है।अब्दुल कलाम के परिवार के लिए गांव में फैली बीमारी कहर बनकर टूटी है। उनके छह वर्षीय पुत्र मुजम्मिल की शनिवार की रात को मौत हो गई थी। अब अब्दुल कलाम उनकी पत्नी जुबैदा, पुत्र अजमल एव पुत्री महजवी गंभीर रुप से बीमार हैं। इन सभी पीड़ितों में मलेरिया फैल्सीफेरम जांच में पाया गया है। इनकी प्ल्ेटनेटस भी घटकर 50 हजार से कम रह गई हैं। इनको रक्त चढ़ाए़ जाने की जरूरत है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग इनको सहीं ढ़ंग से उपचार दिलाने में नाकाम साबित हुआ है। विभाग के द्वारा इन मरीजों को गंम्भीर अवस्था में अलीगढ़ के दीनदयाल चिकित्सालय में रविवार की रात्रि में भर्ती करने के लिए ले जाया गया। कासगंज के चिकित्सा अधीक्षक स्वयं मरीजों को अलीगढ़ में भर्ती कराने गए थे। लेकिन अलीगढ़ में ये मरीज उपचार के लिए कई घंटों तक तड़पते रहे। उन्हें रक्त तक उपलब्ध नहीं कराया गया। घंटाें तड़पने के बाद इन मरीजों का अलीगढ़ के चिकित्सकों से भरोसा उठ गया। वे खुदा पर भरोसा कर गांव वापस लौट आए। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीके सिंह ने बताया कि इन चारों मरीजों को गांव से कासगंज के संयुक्त चिकित्सालय पर बुलाने के लिए चिकित्सकों को भेज दिया गया है। कासगंज में ही अब इनका इलाज कराया जाएगा। रक्तदाताओं के माध्यम से इनके लिए रक्त की व्यवस्था की जाएगी। अन्य जो भी उपचार क ी जरूरत होगी वो इन उपचार मरीजों को मुहैया कराया जाएगा।