इस पर संतोष ने प्रयागराज निवासी अपने दोस्त सुभाष चंद्र यादव के पेटीएम नंबर पर 10-10 हजार रुपये दो बार में ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद मामले की शिकायत पर सीबीआई ने जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई इंस्पेक्टर संजीव कुमार सिंह की तहरीर पर इन सभी पर एफआईआर दर्ज की गई।
इसलिए जांच में फंस गए
जब सीबीआई ने जांच शुरू की तो सुभाष व संतोष पांडेय का कनेक्शन खोजना शुरू किया। सर्विलांस समेत अन्य कई तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि संतोष व सुभाष दोनों परिचित हैं। पंकज से जो रकम सुभाष को पेटीएम कराई गई थी उसे संतोष ने ली थी। इसी आधार पर सीबीआई ने तीनों को दोषी माना है।
खुद की शिकायत, आरोपी भी बनाए गए
डिप्टी सीआईटी पंकज वर्मा ने मामले की खुद ही शिकायत की थी। चूंकि रिश्वत लेने वाला और देने वाला दोनों दोषी होते हैं, इसलिए उनको भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, जो 290 रुपये की गड़बड़ी मिली थी वह भी आधार बनी। यही वजह है कि पंकज पर भी शिकंजा कसा। ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कराने से सीबीआई को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल गए, जो केस में बेहद अहम हैं।