काेरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच मंलगवार को लंबे समय के बाद कक्षा 6 से लेकर आठवीं तक के स्कूल खुल गए। हालांकि स्कूलों में उपस्थिति कम रही। पहला दिन होने की वजह से कई अभिभावकों ने बच्चों को भेजने के लिए अपनी सहमति नहीं दी।
यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 40 फीसदी तक ही उपस्थिति रही। स्कूलों में अभी ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों ही मोड में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। मुंह पर मास्क लगाए छात्र स्कूल पहुंचे तो उनको सबसे पहले गेट पर ही सैनिटाइज किया गया।
उनका ऑक्सीजन लेवल और तापमान भी चेक किया। कोविड नियमों का पालन करते हुए कुछ स्कूलों ने दो शिफ्ट में बच्चों को बुलाया तो कुछ ने रोल नंबर के आधार पर छात्रों को बुलाया था। पहले दिन की उपस्थिति काफी कम रही। वहीं कुछ स्कूलों ने पहले दिन अभिभावकों की ऑनलाइन मीटिंग रखी, ताकि वह उनकी सवालों के जवाब देकर उन्हें संतुष्ट करें और छात्रों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित कर सकें।
विशेषज्ञों की मानें तो इस महीने यानी अगस्त में ही कोरोना की तीसरी लहर का कहर देखने को मिल सकता है और कोरोना अक्टूबर महीने में अपने पीक पर जा सकता है। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले करीब डेढ़ साल से स्कूल बंद हैं और बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है।
लेकिन जहां नेटवर्क की सुविधा नहीं है, जिन बच्चों के पास मोबाइल-लैपटॉप नहीं हैं, उन बच्चों को काफी परेशानी हो रही है। इस वजह से स्कूलों को धीरे-धीरे खोलने का फैसला लिया जा रहा है। बता दें कि पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते 24 मार्च को लगे लाकडाउन के बाद से ही स्कूल बंद कर दिए गए थे।
औरैया में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप खत्म होने के बाद बंद हुए स्कूल मंगलवार से खोल दिए गए। स्कूलों का पहला दिन होने के कारण सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति काम रही। जबकि निजी स्कूल पहले की तरह गुलजार नजर आए। स्कूल पहुंचने वाले छात्र छात्राओं की थर्मल स्कैनिंग करके सैनिटाइज किया गया।
मास्क लगाने के साथ ही उन्हें कक्षाओं में प्रवेश दिया गया। इस दौरान एक सीट पर एक ही छात्र को बैठाया गया। पहले दिन अधिकांश स्कूलों में कोविड संक्रमण की जानकारी और बचाव के तरीके ही बताते शिक्षक दिखे। महीनों बाद स्कूल पहुंचे बच्चे भी काफी उत्साहित नज़र आये।