प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर समेत देशभर में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए चमड़ा उद्योग से 400 बिलियन डॉलर (लगभग 30 हजार करोड़ रुपये) का निर्यात करने के लिए चमड़ा कारोबारियों के साथ वर्चुअल मीटिंग कर सरकार का रोडमैप साझा किया। कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए नए-नए बाजार तलाशने होंगे।
इसके लिए राज्यों के सहयोग से 75 देशों को निर्यात के लिए 25-25 चमड़ा उत्पाद चिह्नित करने के सुझाव दिए। इसमें दूतावास और उच्चायोग भी सहयोग करेंगे। उन्नाव के बंथर स्थित चर्म निर्यात परिषद के कार्यालय में मौजूद चमड़ा कारोबारियों को करीब 15 मिनट तक प्रधानमंत्री ने संबोधित किया। कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए लॉजिस्टक और ट्रांसपोर्ट पर फोकस करना होगा।
ऐसे देश, जहां निर्यात की संभावनाएं हैं, वहां के दूतावास और उच्चायोग से सहयोग लें। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश से पेट्रो, केमिकल, जेम्स, ज्वैलरी का भी निर्यात बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकारों को भी इस पर ध्यान देना होगा। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की।
इसके बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के अफसरों ने प्रेजेंटेशन देकर निर्यात की संभावनाएं बताई। इस दौरान सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका आदि देेशों के दूतावासों के अफसरों ने भी प्रेजेंटेशन दिया।
वर्चुअल मीटिंग में चर्म निर्यात परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्तारुल अमीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके जालान, क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल, असद के इराकी, एहतेशाम अहमद, ताहिर हुसैन, क्षेत्रीय निदेशक पल्लवी दुबे, केएलसी के निदेशक ओपी पांडेय, राकेश सूरी समेत 35 कारोबारी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री के संबोधन पर चमड़ा कारोबारियों ने खुशी जताई और आगामी वित्तीय वर्ष में निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता जाहिर की।
मजबूत विनिर्माण की जरूरत
वर्चुअल मीटिंग में कहा गया कि गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए उत्पाद तैयार करें। विदेश व्यापार, चर्म निर्यात परिषद के सभी कार्यालय आपस में सहयोग बढ़ाएं और आगे बढ़े। इस दौरान 141 भारतीय दूतावासों और 60 वाणिज्य दूतावासों के अधिकारी शामिल हुए। कई अफसरों ने 15-20 मिनट तक प्रेजेंटेशन भी दिया।
2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने की थी भेंट
रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर के एसपीवी के निदेशक अशरफ रिजवान ने बताया कि 2008 में जब देश में मंदी की स्थिति आई थी तब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने चमड़ा कारोबारियों के प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली बुलाकर बात की थी।