फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर: कम वोटिंग का कलंक धोएंगे या बदनामी का दाग ढोएंगे, पिछले चुनाव में 60 प्रतिशत का भी आंकड़ा छू नहीं पाया था शहर

Sun, 20 Feb 2022 06:36 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

वोट की चोट करो, शहर को रिकॉर्ड धारी बना डालो। 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले में औसत मतदान 57.26 फीसदी रहा, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और घटकर 54.59 प्रतिशत रहा गया।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले विधानसभा चुनाव में लगा कम मतदान का बदनुमा धब्बा धुलने का रविवार को अच्छा मौका है। इस बार जागरुकता नहीं दिखाई तो फिर से पांच साल पछताना होगा और बदनामी का दाग ढोना होगा। तो कानपुर वासियों इस बार कर दिखाना है...।
विज्ञापन


हमारे माथे पर लगा कम मतदान का दाग धो डालना है। साबित करके दिखाना है कि हम भी जागरूक मतदाता हैं। उठो, जागरूक मतदाता की नजीर पेश करो। वोट की चोट करो, शहर को रिकार्ड धारी बना डालो। 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले में औसत मतदान 57.26 फीसदी रहा, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और घटकर 54.59 प्रतिशत रहा गया।

केवल बिठूर और घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र ऐसे रहे, जहां की जनता ने अपने क्षेत्र को दोनों ही चुनावों में फर्स्ट डिवीजन से पास कराया। हालांकि यहां भी मतदान का ग्राफ गिरा लेकिन आंकड़ा 60 फीसदी के पार ही रहा। बिठूर में जहां 2017 में 64.97 फीसदी मतदान हुआ, वहीं 2019 में 61.13 फीसदी मतदान हुआ था।
विज्ञापन


इसी तरह घाटमपुर में भी 2017 में 61.73 और 2019 में 60.89 फीसदी मतदान हुआ। वहीं, 2017 में 63.55 फीसदी मतदान वाले बिल्हौर में 2019 में मतदान प्रतिशत घटकर 59.78 प्रतिशत रह गया। इसके अलावा काई भी विधानसभा क्षेत्र 2017 व 2019 के चुनाव में 60 फीसदी का आंकड़ा पार नहीं कर सका।

यही वजह है कि इस बार जिला प्रशासन, तमाम संस्थाएं, संगठन और स्कूल कॉलेज की ओर से मतदाता जागरुकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखकर हमें मतदान करने जरूर जाना है। घर वालों को, पड़ोसियों को भी प्रेरित करें और उन्हें भी मतदान केंद्र तक ले जाएं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें