कोरोना की तीसरी लहर के लिए तैयारी चल रही है और वायरल फीवर, डेंगू का प्रकोप है लेकिन मंडलीय अस्पताल उर्सला के पीआईसीयू में वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। सामान्य बालरोगियों का इलाज तो हो जा रहा है लेकिन गंभीर हालत में आने वालों को हैलट रेफर किया जा रहा है।
हैलट में वेंटिलेटर बेड फुल होने पर रोगी के परिजन परेशान होते हैं। अगर यहां एक अनेस्थेटिस्ट मिल जाए तो वेंटिलेटर की सुविधा मिलने लगेगी। उर्सला अस्पताल में छह बालरोग विशेषज्ञ तैनात हैं। कमोवेश इतनी ही संख्या जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बालरोग विभाग में भी है लेकिन उर्सला में रोगियों की संख्या हैलट की तुलना में एक चौथाई भी नहीं है।
इस वक्त हैलट में 15 से 20 बालरोगी आ रहे हैं, जिनमें पांच को बुखार के बाद इंसेफ्लाइटिस, मेनिनजाइटिस, न्यूमोनाइटिस आदि हो जाने से इंटेंसिव केयर की जरूरत है। उर्सला का वेंटिलेटर धूल फांक रहा है। अगर इसे चालू कर दिया जाए तो रोगियों को सुविधा मिलने लगेगी।
उर्सला में शहर के अलावा कई जिलों के रोगी आते हैं। वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ होने से अस्पताल में बालरोगियों को बेहतर सुविधा मिल सकती है। लेकिन अव्यवस्था के कारण रोगी सुविधा से वंचित हैं। सीएमएस डॉ. अनिल निगम का कहना है कि बालरोगियों का अस्पताल में इलाज हो रहा है। अनेस्थेटिस्ट मिल जाए तो वेंटिलेटर चालू हो जाएगा। अनेस्थेटिस्ट की शासन से मांग की गई है।