श्रमिकों की मजदूरी में भी गड़बड़ी, वसूली की संस्तुति
वित्तीय वर्ष 2021-22 में शकूराबाद में श्रमिक इस्माइल की 21 दिन की मजदूरी 4221 रुपये दूसरे खाता संख्या में चली गई। सोशल आडिट बैठक तक श्रमिक के सही खाते में इस मजदूरी को नहीं भेजा गया। झूलूमऊ में प्रधान पति रहे अमित कुमार के खाते में 48 दिन की मनरेगा मजदूरी 9648 रुपये भेजी गई। जबकि अमित ने कभी मनरेगा में काम नहीं किया। इसी पंचायत में मनोज कुमार के खेत में मेड़बंदी कार्य पर 5226 रुपये और राजकुमार के खेत में इसी कार्य पर 4824 रुपये व्यय किया गया। जबकि दोनों कार्य ग्राम पंचायत द्वारा कराए ही नहीं गए। वित्तीय वर्ष 2022-23 में हयासपुर में श्रमिक राजकुमार को सौ दिन से एक दिन ज्यादा की मजदूरी का भुगतान किया गया, जिसकी 204 रुपये की वसूली होनी थी। लखनापुर में पीपल चौराहे से श्रीराम के खेत तक डामर रोड के दोनों तरफ पटरी भराई व सफाई कार्य में मूल मस्टर रोल में श्रमिक दिनेश अनुपस्थित रहे। जबकि एमआईएस में दिनेश को सात दिन की मजदूरी 1428 रुपये का भुगतान किया गया।
दो वित्तीय वर्ष में मनरेगा में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन जब जांच के लिए अभिलेख मांगे गए तो वह उपलब्ध नहीं कराए गए। इसका सीधा सा अर्थ है कि जो खर्च हुआ है, वह संदेह के घेरे में है। इसको लेकर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर बीडीओ फतेहपुर चौरासी सहित अन्य जिम्मेदारों से वसूली की संस्तुति की गई है। - अतुल निगम, लोकपाल मनरेगा