फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Unnao: अब फतेहपुर चौरासी ब्लाॅक की पंचायतों में 46 लाख का गड़बड़झाला, जांच के लिए लोकपाल को नहीं दिए अभिलेख

Tue, 16 May 2023 06:10 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

फतेहपुर चौरासी ब्लाॅक की पंचायतों में 46 लाख का गड़बड़झाला सामने आया है। मनरेगा कार्यों पर कथित रूप से खर्च हुए 46 लाख को लोकपाल ने संदेहात्मक माना है। इसके साथ ही वसूली के लिए पत्र भेजा है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उन्नाव जिले में बांगरमऊ के बाद अब फतेहपुर चौरासी विकासखंड की ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए गए कथित कार्यों में 46 लाख की गड़बड़ी सामने आई है। इन कथित कार्यों की जांच के लिए मांगे गए अभिलेख उपलब्ध न कराने पर लोकपाल ने खर्च की गई धनराशि को संदेहात्मक मानते हुए जिम्मेदारों से वसूली के लिए मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजा है।

विज्ञापन


23 जनवरी 2023 को लोकपाल अतुल निगम फतेहपुर चौरासी विकासखंड में सोशल आडिट बैठक में पहुंचे थे। यहां उन्होंने सोशल आडिट से संबंधित गांवों में वसूली योग्य प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की थी। ग्राम पंचायत राजेपुर में वर्ष 2021-22 में कराए गए 8.23 लाख के कार्यों से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। ग्राम पंचायत रज्जाकपुर में श्रमांश से 31.96 लाख और सामग्री पर 17800 रुपये का खर्च दिखाया गया, लेकिन जांच के लिए अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।

मझरियाकला में भी श्रमांश पर 6.33 लाख और सामग्री पर 42646 रुपये का भुगतान दिखाया गया, लेकिन इससे संबंधित कोई भुगतान पत्रावली नहीं मिली। राजेपुर में प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाईस्कूल में वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण कार्यों व बिल बाउचर्स के अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए, जबकि कुल व्यय 103823 रुपये दिखाया गया। इसके अलावा फखरापुर, गौरीमऊ, दबौली में कारवां तालाब की खुदाई कार्य से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

श्रमिकों की मजदूरी में भी गड़बड़ी, वसूली की संस्तुति
वित्तीय वर्ष 2021-22 में शकूराबाद में श्रमिक इस्माइल की 21 दिन की मजदूरी 4221 रुपये दूसरे खाता संख्या में चली गई। सोशल आडिट बैठक तक श्रमिक के सही खाते में इस मजदूरी को नहीं भेजा गया। झूलूमऊ में प्रधान पति रहे अमित कुमार के खाते में 48 दिन की मनरेगा मजदूरी 9648 रुपये भेजी गई। जबकि अमित ने कभी मनरेगा में काम नहीं किया। इसी पंचायत में मनोज कुमार के खेत में मेड़बंदी कार्य पर 5226 रुपये और राजकुमार के खेत में इसी कार्य पर 4824 रुपये व्यय किया गया। जबकि दोनों कार्य ग्राम पंचायत द्वारा कराए ही नहीं गए। वित्तीय वर्ष 2022-23 में हयासपुर में श्रमिक राजकुमार को सौ दिन से एक दिन ज्यादा की मजदूरी का भुगतान किया गया, जिसकी 204 रुपये की वसूली होनी थी। लखनापुर में पीपल चौराहे से श्रीराम के खेत तक डामर रोड के दोनों तरफ पटरी भराई व सफाई कार्य में मूल मस्टर रोल में श्रमिक दिनेश अनुपस्थित रहे। जबकि एमआईएस में दिनेश को सात दिन की मजदूरी 1428 रुपये का भुगतान किया गया।

दो वित्तीय वर्ष में मनरेगा में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन जब जांच के लिए अभिलेख मांगे गए तो वह उपलब्ध नहीं कराए गए। इसका सीधा सा अर्थ है कि जो खर्च हुआ है, वह संदेह के घेरे में है। इसको लेकर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर बीडीओ फतेहपुर चौरासी सहित अन्य जिम्मेदारों से वसूली की संस्तुति की गई है। - अतुल निगम, लोकपाल मनरेगा

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें