कानपुर में धनतेरस पर खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ी भीड़ ने हवा की सेहत खराब कर दी। आमदिनों के मुकाबले एक साथ डेढ़ गुना से अधिक लोग वाहनों से निकले। इसके चलते जगह-जगह जाम लगने से वाहनों से निकलने वाला दमघोंटू धुआं फेफड़ों को छलनी करता रहा।
मंगलवार को ब्रह्मनगर चौराहे पर नेहरूनगर के पांच सौ मीटर के दायरे में आने वाले बाजारों में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 440 तक पहुंच गया। एक दिन पहले यह 404 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार को शहर का औसत एक्यूआई 264 दर्ज किया गया।
यह लखनऊ (248), वाराणसी (127) से ज्यादा पर दिल्ली (303) और मेरठ (296) से कम रहा। चिंताजनक यह है कि शहर की हवा में पीएम 2.5 की मात्रा सबसे अधिक है, जो सेहत के लिहाज से ज्यादा खतरनाक है। इसमें धूल और धुएं की मात्रा सबसे अधिक होती है।
इसकी तीन वजहें सामने आई हैं। पहली हवा में बढ़ी नमी, दूसरी त्योहारी भीड़ के चलते जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं और तीसरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के बाद भी सड़कों, फुटपाथों और बाजारों में पानी का छिड़काव न किया जाना।