शिकायतकर्ता ने बताया कि मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने बिहार में दो मदरसे बनवाए हैं। मंडलायुक्त के पद पर रहते हुए इफ्तिखारुद्दीन ने शहर से सोलर पैनल बिहार भिजवाए थे। जो मदरसों में लगाए गए थे। इसमें इस बिचौलिये की भी भूमिका रही।
आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन जो साहित्य लोगों को बांटते थे उसको छपवाने और उसके खर्च का पूरा ठेका उनका एक करीबी लेता था। ये करीबी आज भी अफसरों की लॉबी में सक्रिय है। ये सरकारी नौकर नहीं है लेकिन मंडलायुक्त कार्यालय में उसका हस्तक्षेप काफी अधिक है।
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सूत्रों के मुताबिक ये भी एसआईटी की रडार पर है। जांच जब आगे बढ़ेगी तो इससे भी पूछताछ होगी। जिससे पता चल सकेगा कि आखिर ये साहित्य कहां, किसके पास से छपवाता था। इसका भुगतान कौन करता था। आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन धार्मिक प्रचार के लिए दो किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।
उसकी प्रिंटिंग का खर्च आईएएस का करीबी उठाता था। ये शख्स काफी समय से कमिश्नर कार्यालय व आवास में सक्रिय है। एक बड़े पद की जिम्मेदारी भी उसको सौंपी जा चुकी है। वह कुछ न होकर भी बहुत कुछ है क्योंकि उस पर अफसरों का हाथ है। सूत्रों का कहना है कि धार्मिक प्रचार प्रसार के मामले में इसकी मुख्य भूमिका थी। तकरीरें होती थी, जिसमें धर्मांतरण को बढ़ावा देने पर चर्चा होती थी। ये सब बातें इस शख्स की जानकारी में थी।
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बिहार के मदरसों में शहर से सोलर पैनल भेजे गए
शिकायतकर्ता ने बताया कि मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने बिहार में दो मदरसे बनवाए हैं। मंडलायुक्त के पद पर रहते हुए इफ्तिखारुद्दीन ने शहर से सोलर पैनल बिहार भिजवाए थे। जो मदरसों में लगाए गए थे। इसमें इस बिचौलिये की भी भूमिका रही। पता किया जा रहा है कि किस कारोबारी ने भिजवाए।